Vamana Purana· Vāmana Purāṇa
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अध्याय 4 / 95

Adhyaya 4

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पूर्ण अध्याय पाठ56 श्लोक

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अध्याय ४

श्लोक 1

इति श्रीवामपुराणे तृतीयो ऽध्ययः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।एवं कपाली संजातो देवर्षे भगवान्हरः ।अनेन कारणेनासौ दक्षेण न निमन्त्रितः

iti śrīvāmapurāṇe tṛtīyo 'dhyayaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / evaṃ kapālī saṃjāto devarṣe bhagavānharaḥ / anena kāraṇenāsau dakṣeṇa na nimantritaḥ

हिन्दी अर्थ

विजयाकी मौसी सतीसे दक्ष-यज्ञकी वार्ता, सतीका प्राण-त्याग; शिवका क्रोध एवं उनके गणोंद्वारा दक्ष-यज्ञका विध्वंस पुलस्त्य उवाच एवं कपाली संजातो देवर्षे भगवान् हरः। अनेन कारणेनासौ दक्षेण न निमन्त्रितः

English

Pulastya said- O sage! Mahesvara took a bath with the procedures mentioned in the Vedas in that pond when it was suggested by

अध्याय ४

श्लोक 2

कपालिजायेति सतीं विज्ञायाथ प्रजापतिः ।यज्ञे चार्हापि दुहिता दक्षेण न निमन्त्रिता

kapālijāyeti satīṃ vijñāyātha prajāpatiḥ / yajñe cārhāpi duhitā dakṣeṇa na nimantritā

हिन्दी अर्थ

यज्ञे चार्हापि दुहिता दक्षेण न निमन्त्रिता एतस्मिन्नन्तरे देवीं द्रष्टुं गौतमनन्दिनी। जया जगाम शैलेन्द्रं मन्दरं चारुकन्दरम्

English

As soon as dip was taken by lord Sankara (the killer of Tripura demon), the head stuck to his palm got separated and fell down. That holiest place then became famous as Kapalamocana by the grace of god. War between Hari and

अध्याय ४

श्लोक 3

एतस्मिन्नन्तरे देवीं द्रष्टुं गौतमनन्दिनी ।जया जगाम शैलेन्द्रं मन्दरं चारुकन्दरम्

etasminnantare devīṃ draṣṭuṃ gautamanandinī / jayā jagāma śailendraṃ mandaraṃ cārukandaram

हिन्दी अर्थ

तामागतां सती दृष्टा जयामेकामुवाच ह। किमर्थं विजया नागाज्जयन्ती चापराजिता सा देव्या वचनं श्रुत्वा उवाच परमेश्वरीम्। गता निमन्त्रिताः सर्वा मखे मातामहस्य ताः

English

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अध्याय ४

श्लोक 4

तामागतां सती दृष्ट्वा जयमेकामुवाच ह ।किमर्थं विजया नागाज्जयन्ती चापराजिता

tāmāgatāṃ satī dṛṣṭvā jayamekāmuvāca ha / kimarthaṃ vijayā nāgājjayantī cāparājitā

हिन्दी अर्थ

समं पित्रा गौतमेन मात्रा चैवाप्यहल्यया। अहं समागता द्रष्टुं त्वां तत्र गमनोत्सुका किं त्वं न व्रजसे तत्र तथा देवो महेश्वरः। नामन्त्रिताऽसि तातेन उताहोस्विद् व्रजिष्यसि

English

Pulastya said- 0 Devarsi! Lord Sankara became Kapall due to the above-said event. This was the reason why, he was ignored by Daksa Prajapati. In spite of Sat! being qualified with all respects and her being his own daughter, she too was not invited as she was the wife of Kapall.

अध्याय ४

श्लोक 5

सा देव्या वचनं श्रुत्वा उवाच परमेश्वरीम् ।गता निमन्त्रिताः सर्वा मखे मातामहस्य ताः

sā devyā vacanaṃ śrutvā uvāca parameśvarīm / gatā nimantritāḥ sarvā makhe mātāmahasya tāḥ

हिन्दी अर्थ

गतास्तु ऋषयः सर्वे ऋषिपत्यः सुरास्तथा। मातृष्वसः शशाङ्कश्च सपल्रीको गतः क्रतुम् चतुर्दशेषु लोकेषु जन्तवो ये चराचराः। निमन्त्रिताः क्रतौ सर्वे किं नासि त्वं निमन्त्रिता

English

RIT M'di In the meantime, Jaya, the daughter of Gautama went to the mountain Mandara which had the five cave in order to see the goddess Sati.

अध्याय ४

श्लोक 6

समं पित्रा गौतमेन मात्रा चैवाप्यहल्यया ।अहं समागता द्रष्टुं त्वां तत्र गमनोत्सुका

samaṃ pitrā gautamena mātrā caivāpyahalyayā / ahaṃ samāgatā draṣṭuṃ tvāṃ tatra gamanotsukā

हिन्दी अर्थ

पुलस्त्यजी बोले-- देवर्षे! भगवान् शिव इस प्रकार कपाली नामसे ख्यात हुए और इसी कारण वे दक्षके द्वारा निमन्त्रित नहीं हुए। प्रजापति दक्षने सतीको अपनी पुत्री होनेपर भी कपालीकी पत्नी समझकर निमन्त्रणके योग्य न मानकर उन्हें यज्ञमें नहीं बुलाया। इसी बीच देवीका दर्शन करनेके लिये गौतम-पुत्री जया सुन्दर गुफावाले पर्वतश्रेष्ठ मन्दरपर गयी। जयाको वहाँ अकेली आयी देखकर सती बोलीं-विजये! जयन्ती

English

Sail saw only Jaya; therefore she enquired of her as to why Vijaya, and Aparajita did not come with her.

अध्याय ४

श्लोक 7

किं त्वं न व्रजसे तत्र तथा देवो महेश्वरः ।नामन्त्रितासि तातेन उताहोस्विद् व्रजिष्यसि

kiṃ tvaṃ na vrajase tatra tathā devo maheśvaraḥ / nāmantritāsi tātena utāhosvid vrajiṣyasi

हिन्दी अर्थ

और अपराजिता यहाँ क्यों नहीं आयीं ?॥ १--४॥ देवीके वचनको सुनकर विजयाने उन सती परमेश्वरीसे कहा अपने पिता गौतम और माता अहल्याके साथ वे मातामहके सत्र (यज्ञ) -में निमन्त्रित होकर चली गयी हैं। वहाँ जानेके लिये उत्सुक मैं आपसे मिलने आयी हूँ। क्या

English

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अध्याय ४

श्लोक 8

गतास्तु ऋषयः सर्वे ऋषिपत्न्यः सुरास्तथा ।मातृष्वसः शशाङ्कश्च सपत्नीको गतः क्रतुम्

gatāstu ṛṣayaḥ sarve ṛṣipatnyaḥ surāstathā / mātṛṣvasaḥ śaśāṅkaśca sapatnīko gataḥ kratum

हिन्दी अर्थ

आप तथा भगवान् शिव वहाँ नहीं जा रहे हैं ? क्या पिताजीने आपको नहीं बुलाया है? अथवा आप वहाँ जायेंगी? सभी ऋषि, ऋषि-पत्तियाँ तथा देवगण वहाँ गये हैं। हे मातृष्वसः (मौसी) ! पत्नीके सहित शशाङ्क भी उस यज्ञमें गये हैं। चौदहों लोकोंके समस्त चराचर प्राणी उस यज्ञमें निमन्त्रित हुए हैं। क्या आप निमन्त्रित नहीं हैं ?॥ ५--९ ॥

English

She replied- "They all were invited by the maternal grand-father (Daksa) in a yajna arranged there. Hence, they have gone there with father Gautama and mother Ahalya. 1 have come to see curiously your zeal to visit Aren't you and Mahesvara going there? Has your father not invited you? or shall you go

अध्याय ४

श्लोक 9

चतुर्दशसु लोकेषु जन्तवो ये चराचराः ।निमन्त्रिताः क्रतौ सर्वे किं नासि त्वं निमन्त्रिता

caturdaśasu lokeṣu jantavo ye carācarāḥ / nimantritāḥ kratau sarve kiṃ nāsi tvaṃ nimantritā

हिन्दी अर्थ

कपालमोचन तीर्थ काशीके परिसरमें बकरियाकुण्डसे १ मीलपर स्थित है। मन्युनाऽभिप्लुता ब्रह्मन् पञ्चत्वमगमत् ततः

English

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अध्याय ४

श्लोक 10

पुलस्त्य उवाच।।जयायास्तद्वचः श्रुत्वा वज्रपातसमं सती ।मन्युनाभिप्लुता ब्रह्मन् पञ्चत्वमगमत् ततः

pulastya uvāca/ / jayāyāstadvacaḥ śrutvā vajrapātasamaṃ satī / manyunābhiplutā brahman pañcatvamagamat tataḥ

हिन्दी अर्थ

आगतो ददृशे देवीं लतामिव वबनस्पतेः। कृत्तां परशुना भूमौ श्लथाङ्गीं पतितां सतीम् देवीं निपतितां दृष्टा जयां पप्रच्छ शंकरः। किमियं पतिता भूमौ निकृत्तेव लता सती

English

All hermits, their wives and gods have gone there too, O maternal aunt Sasarika too has gone there with his wife.

अध्याय ४

श्लोक 11

जया मृतां सतीं दृष्ट्वा क्रोधशोकपरिप्लुता ।मुञ्चती वारि नेत्राभ्यां सस्वरं विललाप ह

jayā mṛtāṃ satīṃ dṛṣṭvā krodhaśokapariplutā / muñcatī vāri netrābhyāṃ sasvaraṃ vilalāpa ha

हिन्दी अर्थ

सा शंकरवचः श्रुत्वा जया वचनमब्रवीत्। आदित्याद्यास्त्रिलोकेश समं शक्रादिभिः सुरैः । मातृष्वसा विपन्नेयमन्तर्दुःखेन दह्यती

English

All movable and inert organisms from the fourteen lokas have been invited to function there. Are you alone uninvited?

अध्याय ४

श्लोक 12

आक्रन्दितध्वनिं श्रुत्वा शूलपाणिस्त्रिलोचनः ।आः किमेतदितीत्युक्त्वा जयाभ्याशमुपागतः

ākranditadhvaniṃ śrutvā śūlapāṇistrilocanaḥ / āḥ kimetaditītyuktvā jayābhyāśamupāgataḥ

हिन्दी अर्थ

गणाः सिंहमुखा जाता वीरभन्रपुरोगमाः मृगारिवदनं दृष्टा देवाः शक्रपुरोगमाः। ऋषयो यक्षगन्धर्वाः किमिदं त्वित्यचिन्तयन्

English

Pulastya said- O Brahmins! These words from appeared like a thunderbolt to Sat! and she became apgry to the extent that the common people are jeered and that stroke was so hard that she fell down dead. 3JOT W thlmy i ll

अध्याय ४

श्लोक 13

आगतो ददृशे देवीं लतामिव वनस्पतेः ।कृत्तां परशुना भूमौ श्लथाङ्गीं पतितां सतीम्

āgato dadṛśe devīṃ latāmiva vanaspateḥ / kṛttāṃ paraśunā bhūmau ślathāṅgīṃ patitāṃ satīm

हिन्दी अर्थ

द्वारपालस्तदा धर्मो वीरभत्रमुपाद्रवत् तमापतन्तं सहसा धर्मं दृष्टा गणेश्वरः। करेणैकेन जग्राह त्रिशूलं वह्विसन्निभम्

English

Having seen that Sat! met with casual death, Jaya burst into tears and began wailing.

अध्याय ४

श्लोक 14

देवीं निपतितां दृष्ट्वा जयां पप्रच्छ शङ्करः ।किमियं पतिता भूमौ निकृत्तेव लता सती

devīṃ nipatitāṃ dṛṣṭvā jayāṃ papraccha śaṅkaraḥ / kimiyaṃ patitā bhūmau nikṛtteva latā satī

हिन्दी अर्थ

कार्मुकं च द्वितीयेन तृतीयेनाथ मार्गणान्। चतुर्थेन गदां गृह्य धर्ममभ्यद्रवद् गण: पुलस्त्यजी बोले- ब्रह्मन्! (नारदजी !) वञ्रपातके समान जयाकी उस बातको सुनकर क्रोध एवं दुःखसे भरकर सतीने प्राण छोड़ दिये। सतीको मरी हुई देखकर क्रोध एवं दुःखसे भरी जया आँसू बहाते हुए जोर-

English

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अध्याय ४

श्लोक 15

सा शङ्करवचः श्रुत्वा जया वचनमब्रवीत् ।श्रत्वा मखस्था दक्षस्य भगिन्यः पतिभिः सह

sā śaṅkaravacaḥ śrutvā jayā vacanamabravīt / śratvā makhasthā dakṣasya bhaginyaḥ patibhiḥ saha

हिन्दी अर्थ

जोरसे विलाप करने लगी। रोनेकी करुणध्वनि सुनकर शूलपाणि भगवान् शिव “अरे क्या हुआ, कया हुआ'- ऐसा कहकर उसके पास गये। वहाँ पहुँचकर उन्होंने 'फरसेसे कटी वृक्षपर चढ़ी लताकी तरह सतीको भूमिपर मरी पड़ी देखा तो जयासे पूछा--ये सती कटी लताकी तरह भूमिपर क्यों पड़ी हुई हैं? शिवके वचनको सुनकर जया बोली -हे त्रिलोकेश्वर! दक्षके यज्ञमें अपने- अपने पतिके साथ बहनोंका एवं इन्द्र आदि देवोंके साथ

English

As the sound from the wailing was piercing, it awakened lord Sankara from his meditation. He came to Jaya and asked- "What is it?"

अध्याय ४

श्लोक 16

आदित्याद्यास्त्रिलोकेश समं शक्रादिभिः सुरैः ।मातृष्वसा विपन्नेयमन्तर्दुःखेन दह्यती

ādityādyāstrilokeśa samaṃ śakrādibhiḥ suraiḥ / mātṛṣvasā vipanneyamantarduḥkhena dahyatī

हिन्दी अर्थ

आदित्य आदिका निमन्त्रित होकर उपस्थित होना सुनकर आन्तरिक दुःख (की ज्चाला)-से दग्ध हो गयीं। इससे मेरी माताकी बहन (सती)-के प्राण निकल गये पुलस्त्यजीने कहा-- जयाके इस भयंकर (अमङ्गल) वचनको सुनकर शिवजी अत्यन्त क्रुद्ध हो गये । उनके शरीरसे सहसा अग्निकी तेज ज्वालाएँ निकलने लगीं। मुने! इसके बाद क्रोधके कारण त्रिनेत्र भगवान्

English

Lord Sankara saw there Satl lying on the ground like a creeper cut off with a sharp blow by an axe. Her body was as pale as a

अध्याय ४

श्लोक 17

पुलस्त्य उवाच ।एतच्छ्रुत्वा वचो रौद्रं रुद्रः क्रोधाप्लुतो बभौ ।क्रुद्धस्य सर्वगात्रेभ्यो निश्चेरुः सहसार्चिषः

pulastya uvāca / etacchrutvā vaco raudraṃ rudraḥ krodhāpluto babhau / kruddhasya sarvagātrebhyo niśceruḥ sahasārciṣaḥ

हिन्दी अर्थ

शिवके शरीरके लोमोंसे सिंहके समान मुखवाले वीरभद्र आदि बहुत-से रुद्रगण उत्पन्न हो गये। अपने गणोंसे घिरे भगवान् शिव मंदरपर्वतसे हिमालयपर गये और वहाँसे कनखल चले गये, जहाँ दक्ष यज्ञ कर रहे थे। इसके बाद सभी गणोंमें अग्रणी महाबली वीरभद्र शूल धारण किये पश्चिमोत्तर (वायव्य) दिशामें चले गये॥ १७--२०॥

English

Sankara having seen this asked Jaya- "Why has Satl fallen on ground like a cut-off

अध्याय ४

श्लोक 18

ततः क्रोधात् त्रिनेत्रस्य गात्ररोमोद्भाव मुने ।गणाः सिंहमुखा जाता वीरभद्रपुरोगमाः

tataḥ krodhāt trinetrasya gātraromodbhāva mune / gaṇāḥ siṃhamukhā jātā vīrabhadrapurogamāḥ

हिन्दी अर्थ

महामुने! क्रोधसे गदा लेकर जया पूर्व-दक्षिण दिशा (अग्निकोण)-में खड़ी हो गयी और मध्यमें क्रोधसे भरे त्रिशूल लिये शंकर खडे हो गये। सिंहवदन (वीरभद्र)-को देखकर इन्द्र आदि देवता, ऋषि, यक्ष एवं गन्धर्वलोग सोचने लगे कि यह क्या है? तदनन्तर द्वारपाल धर्म धनुष एवं सर्पके समान बाणोंको लेकर चीरभद्रकी ओर दौड़े। सहसा धर्मको आता हुआ देखकर गणेश्वर एक हाथमें अग्निके सदृश त्रिशूल, दूसरे हाथमें

English

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अध्याय ४

श्लोक 19

गणैः परिवृतस्तस्मान्मन्दराद्धिमसाह्वयम् ।गतः कनखलं तस्माद् यत्र दक्षो ऽयजत् क्रतुम्

gaṇaiḥ parivṛtastasmānmandarāddhimasāhvayam / gataḥ kanakhalaṃ tasmād yatra dakṣo 'yajat kratum

हिन्दी अर्थ

धनुष, तीसरे हाथमें बाण और चौथे हाथमें गदा लेकर उनकी ओर दौड़ पड़े ततश्चतुर्भुज दृष्टा धर्मराजो गणेश्वरम्। तस्थावष्टभुजो भूत्वा नानायुधधरोऽव्ययः

English

Jaya replied- "O the ruler of three-worlds! My maternal aunt (Satl) has fallen down dead owing to sheer pain she felt when she heard that all her sisters with their husbands, Indra etc., gods and Adityas etc. have been invited in the yajiia and gone there."

अध्याय ४

श्लोक 20

ततो गणानामधिपो वीरभद्रो महाबलः ।दिशि प्रतीच्युत्तरायां तस्थौ शूलधरो मुने

tato gaṇānāmadhipo vīrabhadro mahābalaḥ / diśi pratīcyuttarāyāṃ tasthau śūladharo mune

हिन्दी अर्थ

चापमार्गणभृत्तस्थी हन्तुकामो गणेश्वरम् गणेश्वरोषपि संक्रुद्धो हन्तुं धर्म सनातनम्। ववर्ष मार्गणांस्तीक्ष्णान् यथा प्रावृषि तोयद्ः

English

Pulastya said- Lord Rudra became excessively angry on hearing this fierce statement from Jaya. Flames started coming out of the body of Sankara so annoyed.

अध्याय ४

श्लोक 21

जया क्रोधाद् गदां गृह्य पूर्वदक्षिणतः स्थिता ।मध्ये त्रिरशूलधृक् शर्वस्तस्थौ क्रोधान्महामुने

jayā krodhād gadāṃ gṛhya pūrvadakṣiṇataḥ sthitā / madhye triraśūladhṛk śarvastasthau krodhānmahāmune

हिन्दी अर्थ

रुधिरारुणसिक्ताङ्गौ किंशुकाविव रेजतुः ततो वरास्त्रैर्गणनायकेन जितः स धर्मः तरसा प्रसह्य।

English

Il ^ II O sages ! The ganas having a mouth similar to that of a lion appeared from the furs of Sankara's body due to excessive fury. Vlrabhadra was the principal gana among them. He then went to the Himalaya from Mandara mountain in the company of all his ganas and Kanakhala from there where the yajna was commenced by Daksa.

अध्याय ४

श्लोक 22

मडगारिवदनं दृष्ट्वा देवाः शक्रपुरोगमाः ।ऋषयो यक्षगन्धर्वाः किमिदं त्वित्यचिन्तयन्

maḍagārivadanaṃ dṛṣṭvā devāḥ śakrapurogamāḥ / ṛṣayo yakṣagandharvāḥ kimidaṃ tvityacintayan

हिन्दी अर्थ

स वीरभद्रः प्रविवेश यज्ञम् यज्ञवाटं प्रविष्टं तं वीरभद्रं गणेश्वरम्। दृष्टा तु सहसा देवा उत्तस्थुः सायुधा मुने

English

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अध्याय ४

श्लोक 23

ततस्तु धनुरादाय शरांश्चाशीविषोपमान् ।द्वारपालस्तदा धर्मो वीरभद्रमुपाद्रवत्

tatastu dhanurādāya śarāṃścāśīviṣopamān / dvārapālastadā dharmo vīrabhadramupādravat

हिन्दी अर्थ

इन्द्राद्या द्वादशादित्या रुद्रास्त्वेकाद॒शैव हि विश्वेदेवाश्च साध्याश्च सिद्धगन्धर्वपन्नगाः। यक्षाः किंपुरुषाञ्चैव खगाश्चक्रधरास्तथा

English

O sage! The mightiest VSrabhadra, the foremost among the Ganas, then held a trident and stood at the west north. OTZf M^ I Adl ll

अध्याय ४

श्लोक 24

तमापतन्तं सहसा धर्मं दृष्ट्वा गणेश्वरः ।करेणैकेन जग्राह त्रिशुलं वह्निसन्निभम्

tamāpatantaṃ sahasā dharmaṃ dṛṣṭvā gaṇeśvaraḥ / kareṇaikena jagrāha triśulaṃ vahnisannibham

हिन्दी अर्थ

राजा वैवस्वताद् वंशाद् धर्मकीर्तिस्तु विश्रुतः । सोमवंशोद्भवश्चोग्रो भोजकीर्तिर्महाभुजः अभिदुद्राव वेगेन सर्वानेव शरोत्करैः

English

O great sages! Jaya in the state of excessive fury stood at the eastern-south with a mace in her hand and Sankara with a trident in his hand stood amid them. Indra etc. gods, hermits, demi-gods (Yaksa) and Gandharvas were caught in surprise when they saw Vlrabhadra in disguise of a lion.

अध्याय ४

श्लोक 25

कार्मुकं च द्वितीयेन तृतीयेनाथ मार्गणान् ।चतुर्थेन गदां गृह्य धर्ममभ्यद्रवद् गणः

kārmukaṃ ca dvitīyena tṛtīyenātha mārgaṇān / caturthena gadāṃ gṛhya dharmamabhyadravad gaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

वीरभद्रेण देवाद्या अवहारमकुर्वत ततो विवेश गणपो यज्ञमध्यं सुविस्तृतम् जुह्याना ऋषयो यत्र हवींषि प्रवितन्वते

English

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अध्याय ४

श्लोक 26

ततश्चतुर्भुजं दृष्ट्वा धर्मराजो गणेश्वरम् ।तस्थावष्टभुनजो भूत्वा नानायुधधरो ऽव्ययः

tataścaturbhujaṃ dṛṣṭvā dharmarājo gaṇeśvaram / tasthāvaṣṭabhunajo bhūtvā nānāyudhadharo 'vyayaḥ

हिन्दी अर्थ

विजयाकी मौसी सतीसे दक्ष-यज्ञकी वार्ता एवं सतीका प्राण-त्याग इसके बाद धर्मराजने चतुर्भुज गणेश्वरको देख और नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंसे सज्जित हो तथा आठ भुजाओंको धारणकर उनका सामना किया और गणोंके स्वामी वीरभद्रपर प्रहार करनेकी इच्छासे वे अपने

English

The gate-man Dharma then rushed towards Vlrabhadra with bows and arrows serpent like.

अध्याय ४

श्लोक 27

खड्गचर्मगदाप्रासपरश्वधवराङ्कुशैः ।चापमार्गणभृत्तस्थौ हन्तुकामो गणेश्वरम्

khaḍgacarmagadāprāsaparaśvadhavarāṅkuśaiḥ / cāpamārgaṇabhṛttasthau hantukāmo gaṇeśvaram

हिन्दी अर्थ

हाथोंमें ढाल, तलवार, गदा, भाला, फरसा, अंकुश, धनुष एवं बाण लेकर खड़े हो गये। गणेश्वर वीरभद्र भी अत्यन्त क्रुद्ध होकर धर्मको मारनेके लिये वर्षाकालिक मेघके सदूश उनके ऊपर तीक्ष्ण बाणोंकी वर्षा करने 'लगे। मुने! धनुषको लिये रुधिरसे लथपथ (अतएव) लाल शरीरवाले वे दोनों महात्मा पलाश-पुष्पके समान दीखने लगे

English

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अध्याय ४

श्लोक 28

गणेश्वरो ऽपि संक्रुद्धो हन्तुं धर्म सनातनम् ।ववर्ष मार्गणास्तीक्ष्णान् यथा प्रावृषि तोयदः

gaṇeśvaro 'pi saṃkruddho hantuṃ dharma sanātanam / vavarṣa mārgaṇāstīkṣṇān yathā prāvṛṣi toyadaḥ

हिन्दी अर्थ

मुनिराज! इसके बाद श्रेष्ठ शस्त्रास्त्रोके कारण वीरभद्रसे पराजित होकर धर्मराज खिन्न होकर पीछे हट गये। इधर वीरभद्र यज्ञशालामें घुस गये। मुने! गणेश्वर वीरभद्रको यज्ञमण्डपमें घुसते देखकर सहसा सभी वसु, अत्यन्त दारुण नवों ग्रह, इन्द्र आदि दिकूपाल, द्वादश आदित्य, एकादश रुद्र, विश्वेदेव, साध्यगण,

English

The principal gana (Vlrabhadra) held a trident analogous to fire in one hand, a bow in another hand, an arrow in the third hand and a mace in the fourth hand and rushed to Dharma when he saw his sudden march. <mrn s* Ft

अध्याय ४

श्लोक 29

तावन्योन्यं महात्मानौ शरचापधरौ मुने ।रुधिरारुणसिक्ताङ्गौ किंशुकाविव रेजतुः

tāvanyonyaṃ mahātmānau śaracāpadharau mune / rudhirāruṇasiktāṅgau kiṃśukāviva rejatuḥ

हिन्दी अर्थ

चक्रधर, वैवस्वत-वंशीय प्रसिद्ध राजा धर्मकीर्ति, चन्द्रवंशीय महाबाहु, उग्र बलशाली राजा भोजकीर्ति, हैत्य-दानव तथा वहाँ आये हुए अन्य सभी लोग आयुध लेकर रौद्र 'वीरभद्रकी ओर दौड़ पड़े धनुष-बाण धारण किये गणोंने उन देवताओंके आते ही उनपर वेगपूर्वक शन्त्रोद्रारा आक्रमण कर दिया। इधर देवताओंने भी वीरभद्रके ऊपर अतुलनीय बाणोंकी वर्षा की। गणनायक वीरभद्रने देवताओंके

English

Imperishable Dharmaraja confronted four armed VIrabhadra with enhancing his eight arms equipped with varied weapons. He stood boldly with the intention to finish VIrabhadra and held a sword, carma (shield), mace, spear, axe, goad, bow and arrow in his hands.

अध्याय ४

श्लोक 31

ततो वरास्त्रैर्गणनायकेन जितः स धर्मः तरसा प्रसह्य ।पराङ्मुखो ऽभूद्विमना मुनीन्द्र स वीरभद्रः प्रविवेश यज्ञम् ।।४।३० यज्ञावाटं प्रविष्टं तं वीरभद्रं गणेश्वरम् ।दृष्ट्वा तु सहसा देवा उत्तस्थुः सायुधा मुने

tato varāstrairgaṇanāyakena jitaḥ sa dharmaḥ tarasā prasahya / parāṅmukho 'bhūdvimanā munīndra sa vīrabhadraḥ praviveśa yajñam / / 4.30 yajñāvāṭaṃ praviṣṭaṃ taṃ vīrabhadraṃ gaṇeśvaram / dṛṣṭvā tu sahasā devā uttasthuḥ sāyudhā mune

हिन्दी अर्थ

अस्त्रोंको छिन्न-भिन्न कर डाला। महात्मा वीरभद्रद्वारा विविध बाणों और अस्त्रोंसे आहत होकर देवता आदि रणभूमिसे भाग चले। तब गणपति वीरभद्र सुविस्तृत यज्ञके मध्यमें प्रविष्ट हुए जहाँ मुनिगण यज्ञकुण्डमें हविकी आहुति दे रहे थे

English

FJtsrctsfir Ft ihi<hhj

अध्याय ४

श्लोक 32

वसवो ऽष्टौ महाभागा ग्रहा नव सुदारुणाः ।इन्द्राद्या द्वादशादित्या रुद्रास्त्वेकादशैव हि

vasavo 'ṣṭau mahābhāgā grahā nava sudāruṇāḥ / indrādyā dvādaśādityā rudrāstvekādaśaiva hi

हिन्दी अर्थ

मुमोच वीरभद्राय कायावरणदारणान् ते तस्य कायमासाद्य अमोघा वै हरेः शराः। निपेतुर्भुवि भग्नाशा नास्तिकादिव याचकाः

English

VIrabhadra too started showering acute arrows on Sanatana Dharma like the clouds dtiring the rainy season so that he could be O sages! Both of them with arrows and bows soaked in blood and looked as red as the flower of canker bloom

अध्याय ४

श्लोक 33

विश्वेदेवाश्च साध्याश्च सिद्धगन्धर्वपन्नगाः ।यक्षाः किंपुरुषाश्चैव खगाश्क्रधरास्तथा

viśvedevāśca sādhyāśca siddhagandharvapannagāḥ / yakṣāḥ kiṃpuruṣāścaiva khagāśkradharāstathā

हिन्दी अर्थ

शरांस्त्वमोघान्मोघत्वमापन्नान्वीक्ष्य केशवः । दिव्यैरस्त्रैवीरभद्रं प्रच्छादयितुमुद्यतः तानस्त्रान् वासुदेवेन प्रक्षिप्तान् गणनायक: । वारयामास शूलेन गदया मार्गणैस्तथा

English

■swfrus: sifa^vi W^II?o||

अध्याय ४

श्लोक 34

राजा वैवस्ताद्वंशाद् धर्मकीर्तिस्तु विश्रुतः ।सोमवंशोद्भवश्चोग्रो भोजकीर्तिर्महाभुजः

rājā vaivastādvaṃśād dharmakīrtistu viśrutaḥ / somavaṃśodbhavaścogro bhojakīrtirmahābhujaḥ

हिन्दी अर्थ

चक्रे निगीर्णे गणनायकेन ततो निःसृतमालोक्य चक्रं कैटभनाशनः। समादाय हृषीकेशो वीरभद्रं मुमोच ह

English

O king of sages! Dharmaraja had to move back as he was conquered by VIrabhadra and thus, VIrabhadra got way to enter into yajiia. O sage! The gods suddenly stood up with weapons in their hands when they saw that VIrabhadra has entered into the pavilion for

अध्याय ४

श्लोक 35

दीतिजा दानवाश्चान्ये ये ऽन्ये तत्र समागताः ।ते सर्वे ऽभ्यद्रवन् रौद्रं वीरभद्रमुदायुधाः

dītijā dānavāścānye ye 'nye tatra samāgatāḥ / te sarve 'bhyadravan raudraṃ vīrabhadramudāyudhāḥ

हिन्दी अर्थ

हृषीकेशेन मुक्तस्तु वीरभद्रो जटाधरम्। गत्वा निवेदयामास वासुदेवात्पराजयम् तब वे महर्षि सिंहमुख वीरभद्रको देखकर भयसे हवन छोड़कर विष्णुकी शरणमें चले गयें। चक्रधारी विष्णुने भयभीत महर्षियोंको दुःखी देखकर 'डरो मत' ऐसा कहकर अपने श्रेष्ठ अस्त्र लेकर खड़े हो गये और

English

ercratalt Mgmmi ust ft pw:i

अध्याय ४

श्लोक 36

तानापतत एवाशु चापबाणधरो गणः ।अभिदुद्राव वेगेन सर्वानेव शरोत्करैः

tānāpatata evāśu cāpabāṇadharo gaṇaḥ / abhidudrāva vegena sarvāneva śarotkaraiḥ

हिन्दी अर्थ

अपने शार्ङ्ग धनुषको चढ़ाकर वीरभद्रके ऊपर शरीरको विदीर्ण करनेवाले अग्निशिखाके तुल्य बाणोंकी वर्षा करने लगे। पर श्रीहरिके वे अमोघ (सफल) बाण वीरभद्रके शरीरपर पहुँचकर भी पृथ्वीपर ऐसे (यों ही व्यर्थ होकर) गिर पड़े, जैसे कि याचक नास्तिकके पाससे विफल निराश होकर लौट जाते हैं

English

Eight Vasus, predominant nine stars, Indra etc., twelve Aditya, eleven Rudra, Visvedeva, Sadhya-ganas, Siddha, Gandharva, Pannaga, Yaksa, eunuch (Kinnaras), Ghosts (Bhuta), Birds, Cakradhara, renowned king Dharmaklrti of Vaivasvata dynasty, Bhojaklrti, the chivalrous king of lunar dynasty, demon, devil and all people present there picked up weapons and rushed to kill the dreadful VIrabhadra.

अध्याय ४

श्लोक 37

ते शस्त्रवर्षमतुलं गणेशाय समुत्सृजन् ।गणेशो ऽपि वरास्त्रैस्तान् प्रचिच्छेद बिभेद च

te śastravarṣamatulaṃ gaṇeśāya samutsṛjan / gaṇeśo 'pi varāstraistān praciccheda bibheda ca

हिन्दी अर्थ

अपने (अव्यर्थ) बाणोंको व्यर्थ होते देखकर भगवान् विष्णु पुनः वीरभद्रको दिव्य अस्त्रोसे ढक देनेके लिये तैयार हो गये। वासुदेवके द्वारा प्रयुक्त उन बाणोंको गणश्रष्ठ वीरभद्रने शूल, गदा और बाणोंसे रोककर विफल कर दिया। भगवान् विष्णुने अपने अस्त्रोंको नष्ट होते देखकर उसपर कौमोदकी गदा फेंकी। किंतु वीरभब्रने उसे भी अपने त्रिशूलसे काटकर पृथ्वीपर गिरा दिया। हलायुधने वीरभद्रकी ओर मूसल और हल फेंका जिसे

English

dWIMdH Hen^J fl l UHIW t FJI: I StfafficT itfrr VI <W : II 3

अध्याय ४

श्लोक 38

शरैः शस्त्रैश्च सततं वध्यमाना महात्मना ।वीरभद्रेण देवाद्या अवहारमर्कुत

śaraiḥ śastraiśca satataṃ vadhyamānā mahātmanā / vīrabhadreṇa devādyā avahāramarkuta

हिन्दी अर्थ

वीरभद्रने गदासे निवारित कर दिया। गदाके सहित मूसल और हलको नष्ट हुआ देखकर गरुडध्वज विष्णुने क्रोधसे वीरभद्रके ऊपर सुदर्शनचक्र चला दिया॥ ४४--४८॥ गणेश्वर वीरभद्रने सैकड़ों सूर्यके सदृश सुदर्शन चक्रको अपनी ओर आते देखा तो शूलको छोड़कर चक्रको वह ऐसे निगल लिया जैसे मीनशरीरधारी विष्णु मधुहैत्यको निगल गये थे। वीरभन्रद्वारा चक्रके निगल

English

The gana VIrabhadra with bow and arrows attacked them and sppedily drove them by throwing

अध्याय ४

श्लोक 39

ततो विवेश गणपो यज्ञमध्यं सुविस्तृतम् ।जुह्वाना ऋषयो यत्र हवींषि प्रवितन्वते

tato viveśa gaṇapo yajñamadhyaṃ suvistṛtam / juhvānā ṛṣayo yatra havīṃṣi pravitanvate

हिन्दी अर्थ

लिये जानेपर विष्णुके सुन्दर काले नेत्र क्रोधसे लाल हो गये। वे उसके निकट पहुँच गये और उसे वेगसे उठा लिया तथा पृथ्वीपर पटककर उसे पीसने लगे। भगवान् विष्णुकी भुजाओं और जाँधोंके प्रबल वेगसे भूतलमें पटके गये वीरभद्रके मुखसे रुधिरके फौहारेके साथ चक्र बाहर निकल आया। चक्रको मुखसे निकला देखकर भगवान् विष्णुने उसे ले लिया और वीरभद्रको छोड़ दिया

English

They all shot arrows in showers at VIrabhadra. VIrabhadra scattered all arrows by the expert use of his weapons.

अध्याय ४

श्लोक 40

ततो महर्षयो दृष्ट्वा मृगेन्द्रवदनं गणम् ।भीता होत्रं परित्यज्य जग्मुः शरणमच्युतम्

tato maharṣayo dṛṣṭvā mṛgendravadanaṃ gaṇam / bhītā hotraṃ parityajya jagmuḥ śaraṇamacyutam

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णुद्वारा छोड़ दिये जानेपर वीरभद्रने जटाधारी शिवके निकट जाकर वासुदेवसे हुई अपनी पराजयका वर्णन किया। फिर वीरभद्रको खूनसे लथ- पथ तथा सर्पके सदृश निःश्वास लेते देख अव्यय

English

The gods etc., ceased fighting as they all were badly injured by the arrows and weapons blown by the unique warrior VIrabhadra. FT * II

अध्याय ४

श्लोक 41

तानार्ताश्चक्रभृद् दृष्ट्वा महर्षीस्त्रस्तमानसान् ।न भेतव्यमितीत्युक्त्वा समुत्तस्थौ वरायुधः

tānārtāścakrabhṛd dṛṣṭvā maharṣīstrastamānasān / na bhetavyamitītyuktvā samuttasthau varāyudhaḥ

हिन्दी अर्थ

वीरभद्रमथादिश्य भद्रकालीं च शंकरः। विवेश क्रोधताम्राक्षो यज्ञवाटं त्रिशूलभृत् ततस्तु देवप्रवरे जटाधरे

English

VIrabhadra then entered just at the centre of that gigantic premise of yajna. The hermits engaged in offering were giving oblations to the fire there.

अध्याय ४

श्लोक 42

समानम्य ततः शार्ङ्ग शरानग्निशिखोपमान् ।मुमोच वीरभद्राय कायावरणदारणान्

samānamya tataḥ śārṅga śarānagniśikhopamān / mumoca vīrabhadrāya kāyāvaraṇadāraṇān

हिन्दी अर्थ

त्रिशूलपाणौ त्रिपुरान्तकारिणि। दक्षस्य यज्ञं विशति क्षयंकरे दक्ष-यज्ञका विध्वंस एवं देवताओंका प्रताइन

English

Fit R?44t ^gT J miqj #T # uftcFiq W$: SRum^JdHJIlfoll

अध्याय ४

श्लोक 43

ते तस्य कायमासाद्य अमोघा वै हरेः शराः ।निपेतुर्भुवि भग्नाशा नास्तिकादिव याचकाः

te tasya kāyamāsādya amoghā vai hareḥ śarāḥ / nipeturbhuvi bhagnāśā nāstikādiva yācakāḥ

हिन्दी अर्थ

जटाधर (शंकर)-ने क्रोध किया। इसके बाद क्रोधसे तिलमिलाये शंकरने अस्त्रसहित वीरभद्रको पहले बतलाये स्थानपर बैठा दिया। वे त्रिशूलधर शंकर वीरभद्र तथा भद्रकालीको आदेश देकर क्रोधसे लाल आँखें किये यज्ञमण्डपमें प्रविष्ट हुए। त्रिपुर नामक

English

The hermits ceased their performance immediately when they saw the lion-mouthed gana and sheltered Acyuta.

अध्याय ४

श्लोक 44

शरास्त्वमोघान्मोघत्वमापन्नान्वीक्ष्य केशवः ।दिव्यैरस्त्रैर्वीरभद्रं प्रच्छादयितुमुद्यतः

śarāstvamoghānmoghatvamāpannānvīkṣya keśavaḥ / divyairastrairvīrabhadraṃ pracchādayitumudyataḥ

हिन्दी अर्थ

राक्षसको मारनेवाले उन त्रिशूलपाणि त्रिपुरारि देवश्रेष्ठ जटाधरके दक्ष-यज्ञमें प्रवेश करते ही ऋषियोंमें भारी भय उत्पन्न हो गया दक्ष-यज्ञका विध्वंस, देवताओंका प्रताड़ून, शंकरके कालरूप और राश्यादि रूपोंमें स्वरूप-कथन

English

Acyuta stood up with a discus in his hands and with words "don’t be afraid" in the lips when he saw those hermits badly frightened and wailing.

अध्याय ४

श्लोक 45

तानस्त्रान्वासुदेवेन प्रक्षिप्तान्गणनायकः ।वारयामास शूलेन गदया मार्गणैस्तथा

tānastrānvāsudevena prakṣiptāngaṇanāyakaḥ / vārayāmāsa śūlena gadayā mārgaṇaistathā

हिन्दी अर्थ

सा तु जाता सरिच्छेष्ठा सीता नाम सरस्वती एकादश तथा रुद्रास्त्रिनेत्रा वृषकेतनाः। कान्दिशीका लयं जग्मुः समभ्येत्यैव शंकरम्

English

He then started shooting arrows like the flames powerful enough to penetrate the external cover of body on Vlrabhadra by giving a slight bend to his Sarriga bow.

अध्याय ४

श्लोक 46

दृष्ट्वा विपन्नान्यस्त्राणि गदां चिक्षेप माधवः ।त्रिशुलेन समाहत्य पातयामास भूतले

dṛṣṭvā vipannānyastrāṇi gadāṃ cikṣepa mādhavaḥ / triśulena samāhatya pātayāmāsa bhūtale

हिन्दी अर्थ

विश्वेऽश्विनौ च साध्याश्च मरुतोऽनलभास्कराः। समासाद्य पुरोडाशं भक्षयन्तो महामुने ततः क्रोधाभिभूतेन शंकरेण महात्मना। तलप्रहारैरमरा बहवो विनिपातिताः

English

As the beggar returns with a despair in mind from the atheist, the target hitting arrows shot by Sri Hari fell down on the ground after touching merely the i. udy of Vlrabhadra.

अध्याय ४

श्लोक 47

मुशलं वीरभद्राय प्रचिक्षेप हलायुधः ।लाङ्गलं च गणेशो ऽपि गदया प्रत्यवारयत्

muśalaṃ vīrabhadrāya pracikṣepa halāyudhaḥ / lāṅgalaṃ ca gaṇeśo 'pi gadayā pratyavārayat

हिन्दी अर्थ

पुलस्त्यजी बोले-जटाधारी भगवान् शिवको क्रोधसे आँखें लाल किये देखकर भगवान् विष्णु उस स्थानसे हटकर कुन्जाग्र (ऋषिकेश)-में छिप गये। मुने! क्रुद्ध शिवको देखकर आठ वसु तेजीसे पिघलने लगे। इस कारण वहाँ सीता नामकी श्रेष्ठ नदी प्रवाहित हुई। वहाँ पूजाके लिये स्थित त्रिनेत्रधारी ग्यारहों रुद्र भयके मारे इधर-उधर भागते हुए शंकरके निकट जाकर उनमें ही लीन हो गये। महामुनि नारद! शंकरको निकट आते

English

Kesava intended immediately for covering Vlrabhadra by divine weapons when he saw the futility of arrows in their mission.

अध्याय ४

श्लोक 48

मुशलं सगदं दृष्ट्वा लाङ्गलं च निवारितम् ।वीरभद्राय चिक्षेप चक्रं क्रोधात् खगध्वजः

muśalaṃ sagadaṃ dṛṣṭvā lāṅgalaṃ ca nivāritam / vīrabhadrāya cikṣepa cakraṃ krodhāt khagadhvajaḥ

हिन्दी अर्थ

देख विश्वेदेवगण, अश्विनीकुमार, साध्यवृन्द, वायु, अग्नि एवं सूर्य पुरोडाश खाते हुए भाग गये॥ १--४॥ फिर तो ताराओंके साथ चन्द्रमा रात्रिको प्रकाशित करते हुए आकाशमें ऊपर जाकर अपने स्थानपर स्थित हो गये। इधर कश्यप आदि ऋषि शतरुद्रिय (मन्त्र)- का जप करते हुए अझलिमें पुष्प लेकर विनीतभावसे

English

Those arrows from Vasudeva too were destroyed by confronting with sula, mace and

अध्याय ४

श्लोक 49

तमापतन्तं शतसूर्यकल्पं सुदर्शनं वीक्ष्य गणेश्वरस्तु ।शूलं परित्यज्य जगार चक्रं यथा मधुं मीनवपुः सुरेन्द्रः

tamāpatantaṃ śatasūryakalpaṃ sudarśanaṃ vīkṣya gaṇeśvarastu / śūlaṃ parityajya jagāra cakraṃ yathā madhuṃ mīnavapuḥ surendraḥ

हिन्दी अर्थ

खड़े हो गये। इन्द्रादि सभी देवताओंसे अधिक बली रुद्रको देखकर दक्ष-पत्री अत्यन्त दीन होकर बार-बार करुण विलाप करने लगी। इधर क्रुद्ध भगवान् शंकरने थप्पड़ोंके प्रहासे अनेक देवताओंको मार दृष्टयग्निना तथैवान्ये देवाद्याः प्रलयीकृताः

English

Madhava threw his mace when he saw his weapons destroyed by Vlrabhadra. However, Vlrabhadra threw it on the earth with a blow of his trident.

अध्याय ४

श्लोक 50

चक्रे निगीर्णे गणनायकेन क्रोधातिरक्तो ऽसितचारुनेत्रः ।मुरारिरभ्येत्य गणाधिपेन्द्रमुत्क्षिप्य वेगाद् भुवि निष्पिपपेष

cakre nigīrṇe gaṇanāyakena krodhātirakto 'sitacārunetraḥ / murārirabhyetya gaṇādhipendramutkṣipya vegād bhuvi niṣpipapeṣa

हिन्दी अर्थ

तमापतन्तं भगवान् संनिरीक्ष्य त्रिलोचनः। बाहुभ्यां प्रतिजग्राह करेणैकेन शंकरः कराभ्यां प्रगृहीतस्य शंभुनांशुमतोऽपि हि। कराङ्खलिभ्यो निश्चेरुरसृग्धाराः समन्ततः

English

rlt fe»4>Hi ^gT HI^tH viRim«&R:I di^T'i ’ET M<;«u JTfTOTOrljrtf^ll ■pet qlwsro Tff%i^rtr

अध्याय ४

श्लोक 51

हरिबाहूरुवेगेन विनिष्पिष्टस्य भूतले ।सहितं रुधिरोद्गारैर्मुकाच्चक्रं विनिगतम्

haribāhūruvegena viniṣpiṣṭasya bhūtale / sahitaṃ rudhirodgārairmukāccakraṃ vinigatam

हिन्दी अर्थ

ततो वेगेन महता अंशुमन्तं दिवाकरम्। भ्रामयामास सततं सिंहो मृगशिशुं यथा भ्रामितस्यातिवेगेन नारदांशुमतोऽपि हि। भुजौ हृस्वत्वमापन्नौ त्रुटितस्त्रायुबन्धनौ

English

pet w ^gT eft^et ^ felftpi

अध्याय ४

श्लोक 52

ततो निःसृतमालोक्य चक्रं कैटभनाशनः ।समादाय हृषीकेशो वीरभद्रो मुमोच ह

tato niḥsṛtamālokya cakraṃ kaiṭabhanāśanaḥ / samādāya hṛṣīkeśo vīrabhadro mumoca ha

हिन्दी अर्थ

प्रोवाचैह्ोहि कापालिन् पुनः पुनरथेश्वरम् निपातयामास भुवि क्षोभयन् सर्वदेवताः

English

Musala and Larigala were thrown on the part of Halayudha but these weapons too were thrown down by Vlrabhadra through his mace. Garudadhvaja severely in furiated and attacked with a discus Vlrabhadra when he saw the failure of attack by mace including Musala and plough.

अध्याय ४

श्लोक 53

हृषीकेशेन मुक्तस्तु वीरभद्रो जटाधरम् ।गत्वा निवेदयामास वासुदेवात्पराजयम्

hṛṣīkeśena muktastu vīrabhadro jaṭādharam / gatvā nivedayāmāsa vāsudevātparājayam

हिन्दी अर्थ

ततो दिवाकराः सर्वे पुरस्कृत्य शतक्रतुम्। मरुद्धिश्च हुताशैश्च भयाज्जग्मुर्दिशो दश प्रतियातेषु देवेषु प्रह्मादाद्या दितीश्वराः।

English

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अध्याय ४

श्लोक 54

ततो जटाधरो दृष्ट्वा गणेशं शोणिताप्लुतम् ।निश्वसन्तं यथा नागं क्रोधं चक्रे तदाव्ययः

tato jaṭādharo dṛṣṭvā gaṇeśaṃ śoṇitāplutam / niśvasantaṃ yathā nāgaṃ krodhaṃ cakre tadāvyayaḥ

हिन्दी अर्थ

ततस्तं यज्ञवाटं तु शंकरो घोरचक्षुषा ददर्शं दग्धुं कोपेन सर्वाश्चैव सुरासुरान् मुने! शंकरने इसी प्रकार कुछ देवताओंको पैरोंके प्रहारसे, कुछको त्रिशूलसे और कुछको अपने तृतीय नेत्रकी अग्नद्वारा नष्ट कर दिया। उसके बाद देवों एवं असुरोंका संहार करते हुए शंकरको देखकर पूषादेवता (अन्यतम

English

Vlrabhadra (Ganes'vara) had however, gobbled up that discus luminating with the light of several hundred suns by leaving his sula aside. It was done in the same way as lord Surendra had gobbled up the Madhu while disguised as a fish.

अध्याय ४

श्लोक 55

ततः क्रोधाभिभूतेन वीरभद्रो ऽथ शंभुना ।पूर्वोद्दिष्टे तदा स्थाने सायुधस्तु निवेशितः

tataḥ krodhābhibhūtena vīrabhadro 'tha śaṃbhunā / pūrvoddiṣṭe tadā sthāne sāyudhastu niveśitaḥ

हिन्दी अर्थ

सूर्य) क्रोधपूर्वक दोनों बाँहोंको फैलाकर शिवजीकी ओर दौड़े। त्रिलोचन शिवने उन्हें अपनी ओर आते देख एक ही हाथसे उनकी दोनों भुजाओंको पकड़ लिया। शिवद्वारा सूर्यके पकड़ी गयी दोनों भुजाओंकी अङ्गुलियॉँसे चारों ओर रक्तकी धारा प्रवाहित होने लगी

English

When the discus was gobbled up by Gananayaka (Vlrabhadra) the dark and beautiful eyes of Murari turned red with anger. He went to Vlrabhadra, lifted him up at once, knoeked him down on ground and started thrashing him.

अध्याय ४

श्लोक 56

वीरभद्रमथादिश्य भद्रकालीं च शङ्करः ।विवेश क्रोधताम्राक्षो यज्ञवाटं त्रिशूलभृत्

vīrabhadramathādiśya bhadrakālīṃ ca śaṅkaraḥ / viveśa krodhatāmrākṣo yajñavāṭaṃ triśūlabhṛt

हिन्दी अर्थ

फिर भगवान् शिव दिवाकर सूर्यदेवको अत्यन्त वेगसे ऐसे घुमाने लगे जैसे सिंह हिरण-शावकको घुमाता (दौड़ाता) है। नारदजी! अत्यन्त वेगसे घुमाये गये सूर्यकी भुजाओंके स्नायुबन्ध टूट गये और वे (स्नायुएँ) बहुत छोटी--नष्टप्राय हो गयीं। सूर्यके सभी अङ्गोंको रक्तसे लथपथ देखकर उन्हें छोड़कर शंकरजी दूसरी ओर चले गये। उसी समय हँसते एवं दाँत दिखलाते हुए पूषा देवता (बारह आदित्योंमेंसे एक सूर्य) कहने लगे-

English

Owing to the hard blows of arms and legs of Hari, the discus came out from the mouth of Vlrabhadra with blood when he was knocked down with a

अध्याय ४

श्लोक 57

ततस्तु देवप्रवरे जटाधरे त्रिशूलपाणौ त्रिपुरान्तकारिणि ।दक्षस्य यज्ञं विशति क्षयङ्करे जातो ऋषीणां प्रवरो हि साध्वसः

tatastu devapravare jaṭādhare triśūlapāṇau tripurāntakāriṇi / dakṣasya yajñaṃ viśati kṣayaṅkare jāto ṛṣīṇāṃ pravaro hi sādhvasaḥ

हिन्दी अर्थ

इसपर क्रुद्ध रुद्रने वेगपूर्वक मुक्केसे मारकर पूषाके दाँतोंको धरतीपर गिरा दिया। इस प्रकार दाँत टूटने एवं रक्तसे लथपथ होकर पूषा देवता वज्रसे नष्ट हुए पर्वतके समान बेहोश होकर पृथ्वीपर गिर पड़े। इस प्रकार गिरे हुए पूषाको रुधिरसे लथपथ देखकर भग देवता (तृतीय सूर्यभेद) भयंकर नेत्रोंसे शिवजीको देखने लगे। इससे क्रुद्ध त्रिपुरान्तक शिवने सभी देवताओंको क्षुब्ध करते हुए हथेलीसे पीटकर भगकी दोनों आँखें पृथ्वीपर

English

Destroyer of demon Kaitabha, Hyslkesa then picked up the discus and left Vlrabhadra

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/vamp__u.htm | https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_vAmanapurANasaromAhAtmya.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vamana Purana — Chapter 4
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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