अध्याय १८
श्लोक 1
इति श्रीवामनपुराणे सप्तदशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।मासि चाश्वयुजे ब्रह्मन् यदा पद्मं जगत्पतेः ।नाभ्या निर्याति हि तदा देवेष्वेतान्यथो ऽभवन्
iti śrīvāmanapurāṇe saptadaśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / māsi cāśvayuje brahman yadā padmaṃ jagatpateḥ / nābhyā niryāti hi tadā deveṣvetānyatho 'bhavan
हिन्दी अर्थ
रथियोंमें श्रेष्ठ उस हैत्यने अपने मजबूत धनुषको अपने कानोंतक चढ़ाकर उससे बाणोंकी इस प्रकार वर्षा की जैसे मेघ पृथ्वीपर (घनघोर) जल बरसाते हैं। परंतु अध्याय २० भगवती कात्यायनीका हैत्योंके साथ युद्ध एवं देवीका शिवजीके पादमूलमें लीन हो जाना १०७
English
Description of Greatness of Goddess