Vamana Purana· Vāmana Purāṇa
18
अध्याय 18 / 95

Adhyaya 18

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अध्याय १८

श्लोक 1

इति श्रीवामनपुराणे सप्तदशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।मासि चाश्वयुजे ब्रह्मन् यदा पद्मं जगत्पतेः ।नाभ्या निर्याति हि तदा देवेष्वेतान्यथो ऽभवन्

iti śrīvāmanapurāṇe saptadaśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / māsi cāśvayuje brahman yadā padmaṃ jagatpateḥ / nābhyā niryāti hi tadā deveṣvetānyatho 'bhavan

हिन्दी अर्थ

रथियोंमें श्रेष्ठ उस हैत्यने अपने मजबूत धनुषको अपने कानोंतक चढ़ाकर उससे बाणोंकी इस प्रकार वर्षा की जैसे मेघ पृथ्वीपर (घनघोर) जल बरसाते हैं। परंतु अध्याय २० भगवती कात्यायनीका हैत्योंके साथ युद्ध एवं देवीका शिवजीके पादमूलमें लीन हो जाना १०७

English

Description of Greatness of Goddess

अध्याय १८

श्लोक 2

कन्दर्पस्य कराग्रे तु कदम्बश्चारुदर्शनः ।तेन तस्य परा प्रीतिः कदम्बेन विवर्द्धते

kandarpasya karāgre tu kadambaścārudarśanaḥ / tena tasya parā prītiḥ kadambena vivarddhate

हिन्दी अर्थ

इत्वा सारथिमेकेन ध्वजमेकेन चिच्छिदे ततस्तु सशरं चापं चिच्छेहैकेषुणाऽम्बिका। छिन्ने धनुषि खड्गं च चर्म चादत्तवान् बली

English

raraift item w$r i gi n:i

अध्याय १८

श्लोक 3

यक्षाणामधिपस्यापि मणिभद्रस्य नारद ।वटवृक्षः समभवत् तस्मिस्तस्य यतिः सदा

yakṣāṇāmadhipasyāpi maṇibhadrasya nārada / vaṭavṛkṣaḥ samabhavat tasmistasya yatiḥ sadā

हिन्दी अर्थ

तं खड्गं चर्मणा सार्धं हैत्यस्याधुन्वतो बलात्। शरैश्चतुर्भिश्चिच्छेद ततः शूलं समाददे समुद्भ्राम्य महच्छूलं संप्राद्रवदथाम्बिकाम्। क्रोष्टुको मुदितोऽरण्ये मृगराजवधूं यथा

English

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अध्याय १८

श्लोक 4

महेश्वरस्य हृदये धत्तूरविटपः शुभः ।संजातः स च शर्वस्य पतिकृत् तस्य नित्यशः

maheśvarasya hṛdaye dhattūraviṭapaḥ śubhaḥ / saṃjātaḥ sa ca śarvasya patikṛt tasya nityaśaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्याभिपततः पादौ करौ शीर्ष च पञ्चभिः। शरैश्चिच्छेद संक्रुद्धा न्यपतन्निहतोऽसुरः तस्मिन् सेनापतौ क्षुण्णे तदोग्रास्यो महासुरः। समाद्रवत वेगेन करालास्यश्च दानवः

English

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अध्याय १८

श्लोक 5

ब्रह्मणो मध्यतो देहाञ्जातो मरकतप्रभः ।ख दरः कण्टकी श्रेयानभवद्विश्वकर्मणः

brahmaṇo madhyato dehāñjāto marakataprabhaḥ / kha daraḥ kaṇṭakī śreyānabhavadviśvakarmaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

बाष्कलश्चोदद्वतश्चैव उददग्राख्योग्रकार्मुकः। दुर्द्वरो दुर्मुखश्चैव बिडालनयनोऽपरः कात्यायनीमाद्रवन्त नानाशस्त्रास्त्रपाणयः

English

Pulastya said- The gods defeated by Mahisa left their respective places and appeared before Lak$mlpati (Sri Vi$nu) under lead of lord Brahma with their respective carriers (vahanas) and weapons.

अध्याय १८

श्लोक 6

गिरिजायाः करतले कुन्दसुल्मस्त्वजायत ।गणाधिपस्य कुम्भस्थो राजते सिन्धुवारकः

girijāyāḥ karatale kundasulmastvajāyata / gaṇādhipasya kumbhastho rājate sindhuvārakaḥ

हिन्दी अर्थ

यथा यथा वादयते देवी वाद्यानि तानि तु। तथा तथा भूतगणा नृत्यन्ति च हसन्ति च अभ्यध्नंस्तांश्च जग्राह केशेषु परमेश्वरी

English

ftsirft U^KHYI$<1 %l

अध्याय १८

श्लोक 7

यमस्य क्षिणे पार्श्वे पालाशो दक्षिणोत्तरे ।कृष्णोदुम्बरको रुद्राज्जातः क्षोमकरो वृषः

yamasya kṣiṇe pārśve pālāśo dakṣiṇottare / kṛṣṇodumbarako rudrājjātaḥ kṣomakaro vṛṣaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रगृह्र केशेषु महासुरांस्तान् ततस्तु देव्या बलिनो महासुरा

English

They saw there lord Visnu and Sankara seated together. They saluted them and described the heinous acts being committed by Mahisa etc. demons.

अध्याय १८

श्लोक 8

स्कन्दस्य बन्धुजीवस्तु रवेरश्वत्थ एव च ।कात्यायनयाः शमीजाताबिल्वो लक्ष्मायाः करे ऽभवत्

skandasya bandhujīvastu raveraśvattha eva ca / kātyāyanayāḥ śamījātābilvo lakṣmāyāḥ kare 'bhavat

हिन्दी अर्थ

विस्रस्तवस्त्रा व्यसवश्च जाताः देव्या महौजा महिषासुरस्तु

English

'^ryr?id>iRtft rarfiratrcTgi

अध्याय १८

श्लोक 9

नागानां पतये ब्रह्मञ्छरस्तम्बो व्यजायत ।वासुकेर्विस्तृते पुच्छे पृष्ठे दूर्वा सितासिता

nāgānāṃ pataye brahmañcharastambo vyajāyata / vāsukervistṛte pucche pṛṣṭhe dūrvā sitāsitā

हिन्दी अर्थ

दुर्गाने भी सुन्दर पर्वो (गाँठों)-वाले अपने बाणोंसे उन बाणोंको काट डाला और फिर सुवर्णसे निर्मित पंखवाले सोलह बाणोंको अपने हाथोंमें ले लिया। उन्होंने क्रुद्ध होकर चार बाणोंसे उसके चार घोड़ोंको और एकसे सारथीको मारकर एक बाणसे उसकी ध्वजाके दो टुकड़े कर दिये। फिर अम्बिकाने एक बाणसे उसके बाणसहित धनुषको काट डाला। धनुष कट जानेपर बलवान्

English

straw rasng RrtcJktt w

अध्याय १८

श्लोक 10

साध्यानां हृदये जातो वृक्षो हरितचन्दनः ।एवं जातेषु सर्वेषु तेन तत् रतिर्भवेत्

sādhyānāṃ hṛdaye jāto vṛkṣo haritacandanaḥ / evaṃ jāteṣu sarveṣu tena tat ratirbhavet

हिन्दी अर्थ

वह ढाल और तलवारको जोर लगाकर घुमा ही रहा था कि देवीने चार बाणोंसे उन्हें काट डाला। इसपर उस हैत्यने शूल ले लिया। महान् शूलको घुमाकर वह अम्बिकाकी ओर इस प्रकार दौड़ा, जैसे वनमें सियार आनन्दमग्र होकर सिंहिनीकी ओर दौड़े! पर देवीने अत्यन्त क्रुद्ध होकर पाँच बाणोंसे उस असुरके दोनों हाथों, दोनों पैरों एवं मस्तकको काट डाला, जिससे वह असुर मरकर गिर पडा उस सेनापतिके मरनेपर उग्रास्य

English

frarafron ttffra^nru 3 n

अध्याय १८

श्लोक 11

तत्र रम्ये शुभे काले या शुक्लैकादशी भवेत् ।तस्यां संपूजयेद् विष्णुं तेन खण्डो ऽस्य पूर्यते

tatra ramye śubhe kāle yā śuklaikādaśī bhavet / tasyāṃ saṃpūjayed viṣṇuṃ tena khaṇḍo 'sya pūryate

हिन्दी अर्थ

नामका महान् असुर तथा करालास्य नामका दानव -- ये दोनों तेजीसे उनकी ओर दौड़े बाष्कल, उद्धत, उदग्र, उग्रकार्मुक, दुर्द्धर, दुर्मुख

English

(They said) O sovereign gods! The demon Mahisa has confiscated the rights of Asvinlkumaras, sun, moon, wind, fire, Brahma, Varuna, Indra etc. gods and expelled us all from the heaven. We are all compelled to live on the earth.

अध्याय १८

श्लोक 12

पुष्षैः पुत्रैः फलैर्वापि गन्धवर्णरस्न्वितैः ।ओषधीभिश्च मुख्याभिर्यावत्स्याच्छरदागमः

puṣṣaiḥ putraiḥ phalairvāpi gandhavarṇarasnvitaiḥ / oṣadhībhiśca mukhyābhiryāvatsyāccharadāgamaḥ

हिन्दी अर्थ

एवं श्रेष्ठ हैत्य शस्त्र और अस्त्र लेकर दुर्गाकी ओर दौड़ 'पड़े। देवी दुर्गने उन्हें देखा और वे लीलापूर्वक हाथोंमें वीणा एवं श्रेष्ठ डमरू लेकर हँसती हुई उन्हें बजाने लगीं। देवी उन वाद्योंको ज्यों-ज्यों बजाती जाती थीं, त्यों-त्यों अब असुर शस्त्र लेकर महासरस्वतीरूपा दुर्गाके पास जाकर उनपर प्रहार करने लगे। पर परमेश्वरीने (तुरंत) उनके बालोंको जोरके साथ पकड़ लिया। उन महासुरोंका केश पकड़कर और फिर सिंहसे उछलकर

English

frctT srat fcT f|ct gmmgi ^ TttTcrai ftt

अध्याय १८

श्लोक 13

घृतं तिला ब्रीहियवा हिरण्यकन्कादि यत् ।मणिमुक्ताप्रवालानि वस्त्राणि विविधानि च

ghṛtaṃ tilā brīhiyavā hiraṇyakankādi yat / maṇimuktāpravālāni vastrāṇi vividhāni ca

हिन्दी अर्थ

पर्वत-शृङ्गपर जाकर जगज्जननी दुर्गा वीणा-वादन करती हुई मधुपान करने लगीं। तभी देवीने अपने बाहुदण्डोंसे सभी असुरोंको मारकर उनके घमण्डकों चूर कर दिया। उनके वस्त्र शरीरसे खिसक पड़े और वे प्राणरहित हो गये। यह देखकर महाबली महिषासुर अपने खुरके अग्रभागसे, तुण्डसे, पुच्छसे, वक्षःस्थलसे तथा निःश्वास-वायुसे देवीके भूतगणोंको भगाने

English

rranrararragfa^R^rimi

अध्याय १८

श्लोक 14

रसानि स्वादुकट्वम्लकषायलवणानि च ।तिक्तानि च निवेद्यानि तान्यखण्डानि यानि हि

rasāni svādukaṭvamlakaṣāyalavaṇāni ca / tiktāni ca nivedyāni tānyakhaṇḍāni yāni hi

हिन्दी अर्थ

विषाणकोट्या त्वपरान् प्रमथ्य। दुद्राव सिंहं युधि हन्तुकामः ततोऽम्बिका क्रोधवशं जगाम

English

We request you both for delivering a suitable suggestion as we are now sheltered by you and reported the matter completely. In case you give no care to us, we all cruelly beaten in battle by that demon will descend to the nether world immediately and just today

अध्याय १८

श्लोक 15

तत्पूजार्थं प्रदातव्यं केशवाय महात्मने ।यदा संवत्सरं पूर्णमखण्डं भवते गृहे

tatpūjārthaṃ pradātavyaṃ keśavāya mahātmane / yadā saṃvatsaraṃ pūrṇamakhaṇḍaṃ bhavate gṛhe

हिन्दी अर्थ

ततः स कोपादथ तीक्ष्णशृङ्गः 'स चाप्यभूत् क्लिन्नकटः करीन्द्रः ।

English

^5TRif^ra>RTf fftrrarnranmii

अध्याय १८

श्लोक 16

कृतोपवासो देवर्षे द्वितीये ऽहनि संयतः ।स्नानेन तेन स्नायीत येनाखण्डं हि वत्सरम्

kṛtopavāso devarṣe dvitīye 'hani saṃyataḥ / snānena tena snāyīta yenākhaṇḍaṃ hi vatsaram

हिन्दी अर्थ

करं प्रचिच्छेद च हस्तिनोऽग्र निरस्य तत्कोपितया च मुक्तो दण्डस्तु याम्यो बहुखण्डतां गतः

English

Murari with Sankara heard their report and the determination and saw that they were very

अध्याय १८

श्लोक 17

सिद्धार्तकैस्तिलैर्वापि तेनैवोद्वर्तनं स्मृतम् ।हविषा पद्मनाभस्य स्नानमेव समाचरेत् ।होमे तदेव गदितं दाने शक्तिर्निजा द्विज

siddhārtakaistilairvāpi tenaivodvartanaṃ smṛtam / haviṣā padmanābhasya snānameva samācaret / home tadeva gaditaṃ dāne śaktirnijā dvija

हिन्दी अर्थ

सा चापि पदभ्यां मृदुकोमलाभ्यां ममर्द तं क्लिन्नमिवाजिनं हि देव्या बली हीनबलो बभूव।

English

Avyayatma Hari then was filled with anger. His face was blazing like Kalagni.

अध्याय १८

श्लोक 18

पूजयेताथ कुसुमैः पादादारभ्य केशवम् ।धूपयेद् विविधं धूपं येन स्याद् वत्सरं परम्

pūjayetātha kusumaiḥ pādādārabhya keśavam / dhūpayed vividhaṃ dhūpaṃ yena syād vatsaraṃ param

हिन्दी अर्थ

और अपने बिजलीकी कड़कके समान नाद एवं सींगोंकी नोकसे शेष भूतोंको व्याकुल कर रणक्षेत्रे सिंहको मारने दौड़ा। इससे अम्बिकाको बड़ा क्रोध हुआ। फिर वह क्रुद्ध महिष अपने नुकीले सींगोंसे जल्दी-जल्दी पर्वतों एवं पृथ्वीको विदीर्ण करने लगा। चह समुद्रको क्षुब्ध करते तथा मेघोंको तितर-बितर करते हुए दुर्गाकी ओर दौड़ा। इसपर उन देवीने उस दुष्टको पाशसे बाँध दिया, पर वह झटसे मदसे भांगे

English

As a result of anger built up in the minds of Madhusudana, Sankara, Pitamaha and Indra etc. gods, rays came out from their mouths.

अध्याय १८

श्लोक 19

हिरण्यरत्नवासोभिः पूजयेत जगद् गुरुम् ।रागखाण्डवचोष्याणि हविष्याणि निवेदयेत्

hiraṇyaratnavāsobhiḥ pūjayeta jagad gurum / rāgakhāṇḍavacoṣyāṇi haviṣyāṇi nivedayet

हिन्दी अर्थ

कपोलोंवाला गजराज बन गया। (तब) देवीने उस गजके शुण्डका अगला भाग काट डाला। अब उसने पुनः भैसेका रूप धारण कर लिया। महर्षि नारदजी! उसके बाद देवीने उसके ऊपर शूल फेंका जो टूटकर पृथ्वीपर गिर पड़ा। तत्पश्चात् उन्होंने अग्निसे प्राप्त हुई शक्ति फेंकी, किंतु वह भी टूटकर गिर पड़ी

English

T#folT ^Sf 3tnf«T WIIV9II

अध्याय १८

श्लोक 20

ततः संपूज्य देवेशं पद्मनाभं जगद् गुरुम् ।विज्ञापयेन्मुनिश्रेष्ठ मन्त्रेणानेन सुव्रत

tataḥ saṃpūjya deveśaṃ padmanābhaṃ jagad gurum / vijñāpayenmuniśreṣṭha mantreṇānena suvrata

हिन्दी अर्थ

दानवसमूहको मारनेवाला विष्णुप्रदत्त चक्र भी फेंके जानेपर व्यर्थ हो गया। देवीने कुनेरद्वारा दी गयी गदा भी घुमाकर फेंकी, पर वह भी भग्न होकर पृथ्वीपर गिर पड़ी। महिषने वरुणके पाशको भी अपने सींग, थूथना एवं खुरके प्रहारसे विफल कर दिया। फिर कुपित होकर देवीने यमदण्डको छोड़ा, पर उसे भी उसने तोड़कर कई खण्ड-खण्ड कर डाला। उसके शरीरपर देवीद्वारा छोड़ा गया इन्द्रका वज्र भी

English

O hermit! That splendour (ray) was crystallised like the ridge of a mountain in the Ssrama of Katyayana hermit. That hermit processed (upabrhana) that splendour.

अध्याय १८

श्लोक 21

नमो ऽस्तु ते पद्मनाभ पद्माधव महाद्युते ।धर्मार्थकाममोक्षणि त्वखण्डानि भवन्तु मे

namo 'stu te padmanābha padmādhava mahādyute / dharmārthakāmamokṣaṇi tvakhaṇḍāni bhavantu me

हिन्दी अर्थ

छोटे-छोटे टुकड़ोंमें बिखर गया। अब दुर्गाजी सिंहको छोड़कर सहसा महिषासुरकी पीठपर ही चढ़ गयीं। देवीके पीठपर चढ़ जानेपर भी महिषासुर अपने बलके मदसे उछलता रहा। देवी भी अपने मृदुल तथा कोमल चरणोंसे भींगे मृगचर्मके समान उसकी पीठको मर्दन करती गयीं॥ ४४--४७॥

English

The crystallised splendour of all gods and duly processed start glowing like several thousand suns. Such combination of splendour gave birth to caprice and to a huge-eyed and purified body, a goddess called

अध्याय १८

श्लोक 22

विकासिपद्मपत्राक्ष यथाखण्डोसि सर्वतः ।तेन सत्येन धर्माद्य अखण्डाः सन्तु केशव

vikāsipadmapatrākṣa yathākhaṇḍosi sarvataḥ / tena satyena dharmādya akhaṇḍāḥ santu keśava

हिन्दी अर्थ

अन्तमें देवीद्वारा कुचला जाता हुआ पर्वताकार बलवान् महिष बलशून्य हो गया। तब देवीने अपने आहत्य संगृह्य कचेषु कोपात्।

English

^IWHSST^?! +iMvrt^All ||

अध्याय १८

श्लोक 23

एवं संवत्सरं पूर्णं सोपवासो जितेन्द्रियः ।अघण्डं पारयेद् ब्रह्मन् व्रतं वै सर्ववस्तुषु

evaṃ saṃvatsaraṃ pūrṇaṃ sopavāso jitendriyaḥ / aghaṇḍaṃ pārayed brahman vrataṃ vai sarvavastuṣu

हिन्दी अर्थ

हाहाकृतं हैत्यबलं तदाऽभूत् सहासिलोम्ना भयकातराक्षाः।

English

The furious splendour of Mahesvara framed her mouth, the splendour of fire fixed her three eyes, the splendour of Yama originated her hair and the splendour of Hari originated her eighteen arms.

अध्याय १८

श्लोक 24

अस्मिंश्चीर्णे व्रतं व्यक्तं परितुष्यन्ति देवताः ।धर्मार्थकाममोक्षाद्यास्त्वक्षयाः संभवन्ति हि

asmiṃścīrṇe vrataṃ vyaktaṃ parituṣyanti devatāḥ / dharmārthakāmamokṣādyāstvakṣayāḥ saṃbhavanti hi

हिन्दी अर्थ

देव्या जयं देवगणा विलोक्य स्तुवन्ति देवीं स्तुतिभिर्महर्षे। नारायणीं सर्वजगत्प्रतिष्ठां कात्यायनीं घोरमुखीं सुरूपाम् देवीके पुनराविर्भाव-सम्बन्धी प्रश्नोत्तर; संवरण-तपतीका विवाह

English

TTKf n^u| rf ^JRTTS^ra^l

अध्याय १८

श्लोक 25

एतानि ते मयोक्तानि व्रतान्युक्तानि कामिभिः ।प्रक्ष्याम्यधुना त्वेतद्वैष्णवं पञ्जरं शुभम्

etāni te mayoktāni vratānyuktāni kāmibhiḥ / prakṣyāmyadhunā tvetadvaiṣṇavaṃ pañjaraṃ śubham

हिन्दी अर्थ

शूलसे उसकी गर्दन काट दीँ । उसके कटे कण्ठसे तुरंत तलवार लिये एक पुरुष निकल पड़ा। उसके निकलते ही देवीने उसके हृदयपर चरणसे आघात किया और क्रोधसे उसके बालोंको समेटकर पकड़ लिया तथा अपनी श्रेष्ठ तलवारसे उसका भी सिर काट डाला। उस समय हैत्योंकी सेनामें हाहाकार मच गया। चण्ड, मुण्ड, मय, तार और असिलोमा आदि हैत्य भवानीके प्रमथगणोंद्वारा प्रताडित एवं भयसे उद्ठिग्र होकर पातालमें

English

The splendour of moon originated her compact breast, the splendour of Indra originated her loin and the splendour of Varuna originated her thighs, pubic regions

अध्याय १८

श्लोक 26

नमो नमस्ते गोविन्द चक्रं गृह्य सुदर्शनम् ।प्राच्यां रक्षस्व मां विष्णो त्वामाहं शरणं गतः

namo namaste govinda cakraṃ gṛhya sudarśanam / prācyāṃ rakṣasva māṃ viṣṇo tvāmāhaṃ śaraṇaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

प्रविष्ट हो गये। महर्षि नारदजी! इधर देवीकी विजयको देखकर देवतागण स्तुतियोंके द्वारा सम्पूर्ण जगतूकी आधारभूता, क्रोधमुखी, सुरूपा, नारायणी, कात्यायनीदेवीकी स्तुति करने लगे। देवताओं और सिद्धोंद्वारा स्तुति की जाती हुई दुर्गाने “मैं आप देवताओंके श्रेयके लिये पुनः आविर्भूत होऊँगी'-एऐसा कहकर शिवजीके पादमूलमें

English

t!<Ulfa<*lVIMft»fl *n$cl<J:l

अध्याय १८

श्लोक 27

गदां कौमोदकीं गृह्य पद्मनाभामितद्युते ।याम्यां रक्षस्व मां विष्णो त्वमाहं शरणं गतः

gadāṃ kaumodakīṃ gṛhya padmanābhāmitadyute / yāmyāṃ rakṣasva māṃ viṣṇo tvamāhaṃ śaraṇaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

इक्कीसवाँ अध्याय देवीके पुनराविर्भाव-सम्बन्धी प्रशनोत्तर; कुरुक्षेत्रस्थ पृथूदकतीर्थका प्रसङ्ग; संवरण-तपतीका विवाह

English

The splendour of Brahma (lokapitamaha) originated her two feet analogous to lotus petals, toes on feet by the splendour of Aditya and hand fingers originated by the splendour

अध्याय १८

श्लोक 28

हलमादाय सौनन्दं नमस्ते पुरषोत्तम ।प्रतीच्यां रक्ष मे विष्णो भवन्तं शरणं गतः

halamādāya saunandaṃ namaste puraṣottama / pratīcyāṃ rakṣa me viṣṇo bhavantaṃ śaraṇaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

पुलस्त्य कथ्यतां तावद् देव्या भूयः समुद्भवः। महत्कौतूहलं मेऽद्य विस्तराद् ब्रह्मवित्तम शुम्भासुरवधार्थाय लोकानां हितकाम्यया

English

^tir 4l«H!RUl1 W mbdlf^l

अध्याय १८

श्लोक 29

मुसलं शातनं गृह्य पुण्डरीकाक्ष रक्ष माम ।उत्तरस्यां जगन्नाथ भवन्तं शरणं गतः

musalaṃ śātanaṃ gṛhya puṇḍarīkākṣa rakṣa māma / uttarasyāṃ jagannātha bhavantaṃ śaraṇaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

नारदजीने कहा -- ब्रहाज्ञानियोंमें श्रेष्ठ पुलस्त्यजी! अब आप देवीकी उत्पत्तिके विषयमें मुझसे पुनः विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये। उसे सुननेकी मेरी बड़ी अभिलाषा है पुलस्त्यजी बोले मुनिजी! सुनिये; मैं पुनः लोककल्याणकी इच्छासे शुम्भ नामक असुरके वधके लिये देवीकी जो पुनः उत्पत्ति हुई, उसका वर्णन करता हूँ। भगवान् शङ्करने हिमवान्की जिस तपस्विनी कन्या

English

Her teeth were originated by the splendour of nose by the splendour of Yak$as, both ears by the splendour of the wind and both her brows like the Kamadeva’s bow were originated by the splendour of Sadhya.

अध्याय १८

श्लोक 30

शार्ङ्गमादाय च धनुरस्त्रं नारायणं हरे ।नमस्ते रक्ष रक्षघ्न ऐशान्यां शरणं गतः

śārṅgamādāya ca dhanurastraṃ nārāyaṇaṃ hare / namaste rakṣa rakṣaghna aiśānyāṃ śaraṇaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

उमासे विवाह किया था, उन्हींके शरीर-कोश (गर्भ)-से उमा नाम्ना च तस्याः सा कोशाज्जाता तु कौशिकी॥ ३ उत्पन्न होनेके कारण वे देवी कौशिकी कहलायीं।

English

3P3T IjfiloqiqqeirtiRi^i <*lriw4)ti)ct TTT

अध्याय १८

श्लोक 31

पाञ्चजन्यं महाशङ्खमन्तर्बोध्यं च पङ्कजम् ।प्रगृहय् रक्ष मां विष्णो आग्नेय्यां यज्ञसूकर

pāñcajanyaṃ mahāśaṅkhamantarbodhyaṃ ca paṅkajam / pragṛhay rakṣa māṃ viṣṇo āgneyyāṃ yajñasūkara

हिन्दी अर्थ

सा जाता हिमवत्तुत्रीत्येवं मे वक्तुमहसि यथा च पार्वतीकोशात् समुद्भूता हि कौशिकी।

English

3TRT rt ^ SPi rite lll W H

अध्याय १८

श्लोक 32

चर्म सूर्यशतं गृह्य खङ्गं चन्द्रमसं तथा ।नैरृत्यां मां च रक्षस्व दिव्यमूर्ते नृकेसरिन्

carma sūryaśataṃ gṛhya khaṅgaṃ candramasaṃ tathā / nairṛtyāṃ māṃ ca rakṣasva divyamūrte nṛkesarin

हिन्दी अर्थ

शृणुष्वावहितो भूत्वा स्कन्दोत्पत्तिं च शाश्वतीम् स चासीद् देवसेनानीहैंत्यदर्पविनाशनः। शिवरूपत्वमास्थाय सैनापत्यं समुत्सृजत्

English

The great and supreme splendour of hermit was popularly known as and the goddess so originated became famous in this universe with the same name viz.

अध्याय १८

श्लोक 33

वैजयन्तीं प्रगृह्य त्वं श्रीवत्सं कण्ठभूषणम् ।वायव्यां रक्ष मां देव अश्वशीर्ष नमो ऽस्तु ते

vaijayantīṃ pragṛhya tvaṃ śrīvatsaṃ kaṇṭhabhūṣaṇam / vāyavyāṃ rakṣa māṃ deva aśvaśīrṣa namo 'stu te

हिन्दी अर्थ

ततो निराकृता देवाः सेनानाथेन शम्भुना। दानवेन्द्रेण विक्रम्य महिषेण पराजिताः उत्पन्न होनेपर भूतगणोंसे आवृत हो वे विन्ध्यपर्वतपर गयीं और उन्होंने (अपने) श्रेष्ठ आयुधोंसे शुम्भ तथा निशुम्भ नामके दानवोंका वध किया॥ २--४॥ नारदजीने कहा-- ब्रह्मन्! आपने पहले यह

English

fJt TraT5^J?Rf feTRTFp XK II

अध्याय १८

श्लोक 34

वैनतेयं समारुह्य अन्तरिक्षे जनार्दन ।मां त्वं रक्षाजित सदा नमस्ते त्वपराजति

vainateyaṃ samāruhya antarikṣe janārdana / māṃ tvaṃ rakṣājita sadā namaste tvaparājati

हिन्दी अर्थ

बात कही थी कि दक्षकी पुत्री सती ही मरकर फिर हिमवानूकी पुत्री हुई थीं। (अब) इसे आप विस्तारसे सुनाइये। पार्वतीके शरीर-कोशसे जिस प्रकार वे कौशिकी प्रकट हुई और फिर उन्होंने शुम्भ तथा निशुम्भ नामके बड़े असुरोंका जैसे वध किया था--इन सभी बातोंको विस्तारसे कहिये। ये शुम्भ और निशुम्भ नामसे विख्यात वीर किसके पुत्र थे, इसका ठीक-ठीक विस्तारसे वर्णन कीजिये॥ ५--७॥

English

Murari gave a discus, Varuna gave a conch, fire gave a sakti.

अध्याय १८

श्लोक 35

विशालाक्षं समारुह्य रक्ष मां त्वं रसातले ।अकूपार नमस्तुभ्यं महामोह नमो ऽस्तु ते

viśālākṣaṃ samāruhya rakṣa māṃ tvaṃ rasātale / akūpāra namastubhyaṃ mahāmoha namo 'stu te

हिन्दी अर्थ

पुलस्त्यजी बोले-मुने! (अच्छा,) अब मैं फिर आपसे पार्वतीकी उत्पत्तिके विषयमे वर्णन कर रहा हूँ, आप ध्यान देकर (सम्बद्ध) स्कन्दके जन्मकी शाश्वत (नित्य, सदा विराजनेवाली) कथा सुनें! सतीके देह त्याग कर देनेपर रुद्र भगवान् निराश्रय विधुर हो गये एवं ब्रह्मचर्यत्रतका पालन करते हुए तपस्या करने लगे। वे शङ्करजी (पहले) हैत्योंके दर्पको चूर्ण करनेवाले

English

wind gave a bow and surya gave two arrow- stands (tunira) with the undepleting stock of

अध्याय १८

श्लोक 36

करशीर्षाङ्घ्रर्वेषु तथाष्टबाहुपञ्जरम् ।कृत्वा रक्षस्व मां देव नमस्ते पुरुषोत्तम

karaśīrṣāṅghrarveṣu tathāṣṭabāhupañjaram / kṛtvā rakṣasva māṃ deva namaste puruṣottama

हिन्दी अर्थ

त्याग कर) शिव-स्वरूप धारण कर लिया तथा तपमें 'लगकर सेनापति (स्थायी)-पदका भी परित्याग कर दिया। फिर तो देवताओंके ऊपर उनके सेनापति शिवसे विरहित हो जानेके कारण दानवश्रेष्ठ महिषने बलपूर्वक आक्रमण कर उन्हें परास्त कर दिया

English

chifrTisP hm ti m? *111 <mi

अध्याय १८

श्लोक 37

एतदुक्तं भगवता वैष्णवं पञ्जरं महत् ।पुरा रक्षार्थमीशेन कात्यायन्या द्विजोत्तम

etaduktaṃ bhagavatā vaiṣṇavaṃ pañjaraṃ mahat / purā rakṣārthamīśena kātyāyanyā dvijottama

हिन्दी अर्थ

(जब देवसमुदाय पराजित हो गया) तब पराजित हुए देवतालोग शरण-प्राप्तिकी खोजमें देवेश्वर भगवान् श्रीविष्णुके दर्शनार्थ श्वेतद्वीप गये। उस समय भगवान् विष्णु इन्द्र आदि देवताओंको आये हुए देखकर हँसे और मेघके समान गम्भीर वाणीमें बोले--मालूम होता है कि आपलोग असुरोंके स्वामी दुरात्मा महिषसे हार गये हैं, जिसके कारण इस प्रकार एक साथ मिलकर मेरे पास आये हैं? श्रेष्ठ देवताओ! अब आपलोगोंकी

English

Indra gave a thunderbolt with a gong, Yama gave a danda, Kubera gave a mace, Brahma gave a kamandala with basil garland and Kala a gave shield with a sharp edged sword.

अध्याय १८

श्लोक 38

नाशयामास सा यत्र दानवं महिषासुरम् ।नमरं रक्तबीजं च तथान्यान् सुरकण्टकान्

nāśayāmāsa sā yatra dānavaṃ mahiṣāsuram / namaraṃ raktabījaṃ ca tathānyān surakaṇṭakān

हिन्दी अर्थ

भलाईके लिये मैं जो बात कहता हूँ, उसे आप सब सुनिये और उसे (यथावत्) आचरण कीजिये। उसके सहारे आपकी निश्चय विजय होगी॥ १२--१५॥ अमीषां मानसी कन्या मेना नाम्नाउस्ति देवता:

English

The moon gave a garland with camara, the ocean gave a garland, Himalaya gave a lion, Visvakarma gave a cudamani, kundala and an

अध्याय १८

श्लोक 39

नारद उवाच ।कासौ कात्यायानी नाम यचा जघ्ने महिषासुरम् ।नमरं रक्तबीजं च तथान्यान् कुरकण्टकान्

nārada uvāca / kāsau kātyāyānī nāma yacā jaghne mahiṣāsuram / namaraṃ raktabījaṃ ca tathānyān kurakaṇṭakān

हिन्दी अर्थ

दक्षकोपाद् यया मुक्तं मलवज्जीवितं प्रियम् सा शङ्करात् स्वतेजोंऽशं जनयिष्यति यं सुतम्। स हनिष्यति हैत्येन्द्रं महिषं सपदानुगम्

English

The king of Gandharva gave a silver vessel used for liquor sipping, the king of serpent gave a garland of serpents and the seasons gave an unfading flower garland.

अध्याय १८

श्लोक 40

कश्चसौ महिषो नाम कुले जातश्च कस्य सः ।कश्चासौ रक्तबीजाख्यो नमरः कस्य चात्मजः ।एतद्विस्तरतस्तात यथावद् वक्तुमर्हसिः

kaścasau mahiṣo nāma kule jātaśca kasya saḥ / kaścāsau raktabījākhyo namaraḥ kasya cātmajaḥ / etadvistaratastāta yathāvad vaktumarhasiḥ

हिन्दी अर्थ

तत्र पृथूदके तीर्थे पूज्यन्तां पितरोऽव्ययाः पुलस्त्य उवाच इत्युक्त्वा वासुदेवेन देवाः शक्रपुरोगमाः। कृताञ्जलिपुटा भूत्वा पप्रच्छुः परमेश्वरम्

English

The three eyed then was pleased with the gods and made a peal of laughter. The prominent gods like Indra, Visnu, Rudra, moon, wind, fire and sun etc. began to pray to her.

अध्याय १८

श्लोक 41

पुलस्त्य उवाच।।श्रूयतां संप्रवक्ष्यामि कथां पापप्रणाशिनीम् ।सर्वदा वरदा दुर्गा येयं कात्यायनी मुने

pulastya uvāca/ / śrūyatāṃ saṃpravakṣyāmi kathāṃ pāpapraṇāśinīm / sarvadā varadā durgā yeyaṃ kātyāyanī mune

हिन्दी अर्थ

कोऽयं कुरुक्षेत्र इति यत्र पुण्यं पृथूदकम्। उद्भवं तस्य तीर्थस्य भगवान् प्रब्रवीतु नः केयं प्रोक्ता महापुण्या तिथीनामुत्तमा तिथि: ।

English

Rrfr: 'fuwi $ptt *r mm rt mtmrmr R9T tyrf^rcalg mm

अध्याय १८

श्लोक 42

पुरासुरवरौ रौद्रौ जगत्क्षोभकरावुभौ ।रम्भश्चैव करम्भश् च द्वावास्तां सुमाबलौ

purāsuravarau raudrau jagatkṣobhakarāvubhau / rambhaścaiva karambhaś ca dvāvāstāṃ sumābalau

हिन्दी अर्थ

श्रीभगवानुवाच सोमवंशोद्भवो राजा ऋक्षो नाम महाबलः। 'कृतस्यादौ समभवदृक्षात् संवरणोऽभवत् बाल्येऽपि धर्मनिरतो मद्भक्तैश्च सदाऽभवत्

English

RRtsRjj *rf3^fu?n^ii ? o ii

अध्याय १८

श्लोक 43

तावपुत्रौ च देवर्षे पुत्रार्थं तेपतुस्तपः ।बहून् वर्षगणान् दैत्यौ स्थितौ पञ्चनदे जले

tāvaputrau ca devarṣe putrārthaṃ tepatustapaḥ / bahūn varṣagaṇān daityau sthitau pañcanade jale

हिन्दी अर्थ

सर्वकर्मसु निक्षिप्य वसिष्ठं तपसां निथिम् देवीके पुनराविर्भाव-सम्बन्धी प्रश्नोत्तर; संवरण-तपतीका विवाह

English

Salute to the goddess having a pure body with a combination (yoga). She is present everywhere on the earth in the form of sleep. She is temptation, trapa, hunger, fear, gleam, obeisance, memory, health, forgiveness, shade, power, wealth, profession, kindness, illusion and fallacy. Such a goddess in the form of universe is saluted.

अध्याय १८

श्लोक 44

तत्रैको जलमध्यस्थो द्वितीयो ऽप्यग्निपञ्चमी ।करम्भश्चैव रम्भश्च यक्षं मालपटं प्रति

tatraiko jalamadhyastho dvitīyo 'pyagnipañcamī / karambhaścaiva rambhaśca yakṣaṃ mālapaṭaṃ prati

हिन्दी अर्थ

देवगण! जो ये अग्निष्वात्त' नामसे प्रसिद्ध दिव्य पितर हैं, उनकी मेना नामकी एक मानसी कन्या है। देववृन्द! आपलोग अत्यन्त श्रद्धासे अमावास्याको सती मेनाकी (यथाविधि) आराधना करें तथा उनसे हिमालयकी पत्नी बननेके लिये प्रार्थना करें। उन्हीं मेनासे (एक) तपस्विनी रूपवती कन्या उत्पन्न होगी, जिसने दक्षके ऊपर कोपकर अपने प्रिय जीवनका मलके समान परित्याग कर दिया था। वे शिवजीके तेजके अंशरूप

English

The goddess so prayed to gods then rode on a lion and went to the Vindhya mountain having highest peaks which once was restricted from ascending more.

अध्याय १८

श्लोक 45

एकं मिमग्नं सलिले ग्राहरूपेण वासवः ।चरणाभ्यां समादाय निजघान यथेच्छया

ekaṃ mimagnaṃ salile grāharūpeṇa vāsavaḥ / caraṇābhyāṃ samādāya nijaghāna yathecchayā

हिन्दी अर्थ

जिस पुत्रको उत्पन्न करेंगी वह हैत्योंमें श्रेष्ठ महिषको उसकी सेनासहित मार डालेगा कुरक्षत्रमें जायँ एवं वहाँ पृथूदक' नामके तीर्थमें नित्य ही अग्निष्वात्त नामके पितरोंकी पूजा करें। यदि आपलोग अपने शत्रुकी पराजय चाहते हैं तो सब कुछ छोड़कर अमावास्याको उस परम पवित्र तीर्थमें इसी (निर्दिष्ट)

English

^d£dWIM<rWTcl<^IR?ll

अध्याय १८

श्लोक 46

ततो भ्रातरि नष्टे च रम्भः कोपपरिप्लुतः ।वह्नौ स्वशीर्षं संक्षिद्य होतुमैच्चन् महाबलः

tato bhrātari naṣṭe ca rambhaḥ kopapariplutaḥ / vahnau svaśīrṣaṃ saṃkṣidya hotumaiccan mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

कार्यको सम्पन्न करें पुलस्त्यजी बोले भगवान् विष्णुके ऐसा कहनेपर इन्द्र आदि देवताओंने हाथ जोड़कर उन परमात्मासे पूछा-

English

Narada asked- O sacrosanct soul! Please tell us for what reason and purpose hermit Agastya had restricted the ascending peaks of that mountain? Pulastya said- The Vindhya had created a hurdle for the usual movement of sun god

अध्याय १८

श्लोक 47

ततः प्रगृह्य केशेषु खङ्गं च रविसप्रभम् ।छेत्तुकामो निजं शीर्षं वह्निना प्रतिषेधितः

tataḥ pragṛhya keśeṣu khaṅgaṃ ca ravisaprabham / chettukāmo nijaṃ śīrṣaṃ vahninā pratiṣedhitaḥ

हिन्दी अर्थ

कौन है, जहाँ पृथूदक तीर्थ है? आप हमलोगोंको उस तीर्थकी उत्पत्तिके विषयमें बतायें। और, वह पवित्र उत्तम तिथि कौन-सी है जिसमें हम सब दिव्य पितरोंकी पूजा प्रयत्नपूर्वक कर सकें। तब भगवान् विष्णुने देवताओंकी प्रार्थना सुनकर उनसे कुरुक्षेत्रकी पवित्र उत्पत्ति तथा उस उत्तम तिथिका भी वर्णन किया (जिसमें पूजा करनेकी बात कही थी)

English

This became the cause of pain for sun and he went before the renowned hermit Agastya, saluted him and then

अध्याय १८

श्लोक 48

उक्तश्च मा दैत्यवर नाशयात्मानमात्मना ।दुस्तरा परवध्यापि स्ववध्याप्यतिदुस्तरा

uktaśca mā daityavara nāśayātmānamātmanā / dustarā paravadhyāpi svavadhyāpyatidustarā

हिन्दी अर्थ

श्रीभगवान्ने कहा- सत्ययुगके प्रारम्भमें सोमवंशमें ऋक्षनामके एक महाबलवान् राजा उत्पन्न हुए। उन ऋक्षसे संवरणकी उत्पत्ति हुई। पिताने. उसे 'बचपनमें ही राज्यपर अभिषिक्त कर दिया। वह बाल्यकालमें भी सदा धर्मनिष्ठ एवं मेरा भक्त था। वरुणके पुत्र वसिष्ठ उसके पुरोहित थे। उन्होंने उसे अङ्गोंसहित सम्पूर्ण वेदोंको पढ़ाया। एक दिनकी बात है कि अनध्याय (छुट्टी) रहनेपर वह राजपुत्र (संवरण)

English

O Dvija! I have come to you from a distant place. O king of hermits? rescue me. Endow me with the desired thing so that I could move in the sky without the least worry.

अध्याय १८

श्लोक 49

यच्च प्रार्थयसे वीर तद्ददामि यथेप्सितम् ।मा म्रियस्व मृतस्येह नष्टा भवति वै कथा

yacca prārthayase vīra taddadāmi yathepsitam / mā mriyasva mṛtasyeha naṣṭā bhavati vai kathā

हिन्दी अर्थ

तपोनिधि वसिष्ठको सभी कार्य सौंपकर वनमें चला गया ततो मृगयाव्याक्षेपाद् एकाकी विजनं वनम्। वैभ्राजं स जगामाथ अथोन्मादनमभ्ययात्

English

imf wft faytsh tnr grigtftn ^hii

अध्याय १८

श्लोक 50

ततो ऽब्रवीद् वचो रम्भो वरं चेन्मे ददासि हि ।त्रैलोक्यविजयी पुत्रः स्यान्मे त्वत्तेजसाधिकः

tato 'bravīd vaco rambho varaṃ cenme dadāsi hi / trailokyavijayī putraḥ syānme tvattejasādhikaḥ

हिन्दी अर्थ

ततस्तु कौतुकाविष्टः सर्वर्तुकुसुमे वने। अवितृप्तः सुगन्धस्य समन्ताद् व्यचरद् वनम् स वनान्तं च ददृशे फुल्लकोकनदावृतम्। कह्णारपद्मकुमुहैः कमलेन्दीवरैरपि

English

Having heard this cryptic/witty request, Agastya said- "I will endow you with the desired thing as no donor returns empty handed from me."

अध्याय १८

श्लोक 51

अजेयो दैवतैः सर्वैः पुभिर्दैत्यैश्च पावक ।महाबलो वायुरिव कामरूपी कृतास्त्रवित्

ajeyo daivataiḥ sarvaiḥ pubhirdaityaiśca pāvaka / mahābalo vāyuriva kāmarūpī kṛtāstravit

हिन्दी अर्थ

तत्र क्रीडन्ति सततमप्सरोऽमरकन्यकाः। तासां मध्ये ददर्शाथ कन्यां संवरणोऽधिकाम् दर्शनादेव स नृपः काममार्गणपीडितः। जातः सा च तमीक्ष्यैव कामबाणातुराऽभवत्

English

■qftsxr ^ ftfftr: Tremfig tctp?

अध्याय १८

श्लोक 52

तं प्रोवाच कविर्ब्रह्मन् बाञमेवं भविष्यति ।यस्यां चित्तं समालम्बि करिष्यसि ततः सुतः

taṃ provāca kavirbrahman bāñamevaṃ bhaviṣyati / yasyāṃ cittaṃ samālambi kariṣyasi tataḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

उभौ तौ पीडितौ मोहं जग्मतुः काममार्गणैः । राजा चलासनो भूम्यां निपपात तुरंगमात् तमभ्येत्य महात्मानो गन्धर्वाः कामरूपिणः। सिषिचुर्वारिणाऽभ्येत्य लब्धसंज्ञोऽभवत् क्षणात्

English

This nectar-pouring assurance made the sun happy and he said with folded hand- "This mountain is restricting my route today. Hence, O lord! Do try to curtail the height of ffr i

अध्याय १८

श्लोक 53

इत्येवमुक्तो देवेन वह्निना दानवो ययौ ।द्रष्टुं मालवटं यक्षं यक्षैश्च परिवारितम्

ityevamukto devena vahninā dānavo yayau / draṣṭuṃ mālavaṭaṃ yakṣaṃ yakṣaiśca parivāritam

हिन्दी अर्थ

गतस्तु मेरुशिखरं कामचारी यथाऽमरः विवेश देवं तिग्मांशुं ददर्श स्यन्दने स्थितम्

English

f^ftft ftfig w ft TNp?fq;i

अध्याय १८

श्लोक 54

तेषां पद्मनिधिस्तत्र वसते नान्यचेतनः ।गजश्च महिषाश्चाश्वा गावो ऽजाविपरिप्लुताः

teṣāṃ padmanidhistatra vasate nānyacetanaḥ / gajaśca mahiṣāścāśvā gāvo 'jāvipariplutāḥ

हिन्दी अर्थ

तं दृष्टा भास्करं देवं प्रणमद् द्विजसत्तमः। प्रतिप्रणमितश्चासौ भास्करेणाविशद् रथे ज्चलज्जटाकलापोऽसौ दिवाकरसमीपगः। शोभते वारुणिः श्रीमान् द्वितीय इव भास्करः

English

gg r*<uir^dl gftsrfg gfterf gg g<uHtm(yd^i gg aw tu

अध्याय १८

श्लोक 55

तान् दृष्ट्वैव तदा चक्रे भावं दानवपार्थिवः ।महिष्यां रूपयुक्तायां त्रिहायण्यां तपोधन

tān dṛṣṭvaiva tadā cakre bhāvaṃ dānavapārthivaḥ / mahiṣyāṃ rūpayuktāyāṃ trihāyaṇyāṃ tapodhana

हिन्दी अर्थ

फिर शिकारके लिये व्याक्षिप्त (व्यग्र) वह अकेला ही वैभ्राज नामक निर्जन वनमें पहुँचा। उसके बाद वह उन्मादसे ग्रस्त हो गया। उस बनमें सभी ऋतुओंमें फूल 'फूलते रहते थे, सुगन्धि भी रहती थी, फिर भी उससे संतृप्त न होनेके कारण वह कुतूहलवश वनमें चारों ओर विचरण करने लगा। वहाँ उसने फूले हुए श्वेत, लाल, पीले कमल, कुमुद एवं नीले कमलोंसे भरे उस वनको देखा। अप्सराएँ एवं देवकन्याएँ वहाँ सदा मनोरञ्जन

English

Agastya, the pitcher-bom sage replied- "Deem that this mountain has gone down by me. It will be defeated by virtue of your rays. How can any pain pinch one who sheltered

अध्याय १८

श्लोक 56

सा समागाच्च दैत्यैन्द्रं कामयन्ती तरस्विनी ।स चापि गमनं चक्रे भवितव्यप्रचोदितः

sā samāgācca daityaindraṃ kāmayantī tarasvinī / sa cāpi gamanaṃ cakre bhavitavyapracoditaḥ

हिन्दी अर्थ

(मनबहलाव) किया करती थीं। संवरणने उनके बीच एक अत्यन्त सुन्दरी कन्याको देखा उसे देखते ही बह राजा कामदेवके बाणसे पीड़ित (कामसे आशित) हो गया और इसी प्रकार वह कन्या भी उसे देखकर कामबाणसे अधीर (मोहित) हो गयी। कामके बाणोंसे विवश होकर वे दोनों अचेत-से हो गये।

English

With these words the old Agastya worshipped god sun humbly and then set out to see Vindhya.

अध्याय १८

श्लोक 57

तस्यां समभवद् गर्भस्तां प्रगृह्याथ दानवः ।पातालं प्रविवेशाथ ततः स्वभवनं गतः

tasyāṃ samabhavad garbhastāṃ pragṛhyātha dānavaḥ / pātālaṃ praviveśātha tataḥ svabhavanaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

राजा घोड़ेकी पीठपर रखे हुए आसनसे खिसककर पृथ्वीपर गिर पड़ा और इच्छाके अनुसार अपना रूप बना लेनेवाले महात्मा गन्धर्वलोग उसके पास जाकर उसे जलसे सींचने लगे। (फिर) वह दूसरे ही क्षण चेतनामें आ गया। तब अप्सराओंने उसे मधुर वचनरूपी जलसे भी आश्वस्त किया और उसे उठाकर उसके पिताके घर ले

English

gtgygg: uif TjPftgly gift g^rghfor

अध्याय १८

श्लोक 58

दृष्टश्च दानवैः सर्वैः परित्यक्तश्च बन्धुभिः ।अकार्यकारकेत्येवं भृयो मालवटं गतः

dṛṣṭaśca dānavaiḥ sarvaiḥ parityaktaśca bandhubhiḥ / akāryakāraketyevaṃ bhṛyo mālavaṭaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

फिर वह राजा (अपने) घोड़ेपर चढ़कर (अपने) श्रेष्ठ पैठण नगर इस प्रकार चला गया, जैसे कोई इच्छाके अनुसार चलनेवाला देवता (सरलतासे) मेरुश्रृङ्गपर चला जाय। ऋक्षके पुत्र संवरणने पर्वतपर देवकन्या तपतीको जबसे अपनी आँखोंसे देखा था, तबसे वह दिनमें न तो भोजन करता था और न रात्रिमें सोता ही था। फिर सब कुछ जाननेवाले एवं शान्त तथा तपस्याके निधिस्वरूप वरुणके पुत्र महायोगी वसिष्ठ उस वीर

English

^gfST m yir fig detiRitlg dfgi<^qi5t)gdtlSFf mr:ii? , ?ii

अध्याय १८

श्लोक 59

सापि तेनैव पतिना महिषी चारुदर्शना ।समं जगाम तत् पुण्यं यक्षमण्डलमुत्तमम्

sāpi tenaiva patinā mahiṣī cārudarśanā / samaṃ jagāma tat puṇyaṃ yakṣamaṇḍalamuttamam

हिन्दी अर्थ

राजपुत्रको तपतीके कारण संतापमें पड़े देखकर आकाशमें ऊपर जाकर (मध्य आकाशमें स्थित) सूर्यमण्डलमें प्रवेश किया तथा वहाँ रथपर बैठे हुए तेज किरणवाले सूर्यदेवका उसने दर्शन किया द्विजश्रेष्ठ वसिष्ठने सूर्यदेवको देखकर प्रणाम किया। फिर वे सूर्यके द्वारा प्रत्यभिवादन (प्रणामके बदले प्रणाम) किये जानेपर उनके समीप जाकर रथमें बैठ गये। सूर्यदेवके पास रथपर बैठे हुए अग्नि-शिखाके

English

The hermit said to the mountain- "I am now going to see a holy place. I am unable to climb on your so high body due to old age. Hence, shrink your body down immediately for which

अध्याय १८

श्लोक 60

ततस्तु वसतस्तस्य श्यामा सा सुषुवे मुने ।अजीजनत् सुतं शुभ्रं महिषं कामरूपिणम्

tatastu vasatastasya śyāmā sā suṣuve mune / ajījanat sutaṃ śubhraṃ mahiṣaṃ kāmarūpiṇam

हिन्दी अर्थ

समान चमचमाती जटावाले वरुणके पुत्र वसिष्ठ दूसरे ततः सम्पूजितोऽर्घाद्यैर्भास्करेण तपोधन: । पृष्टश्चागमने हेतुं प्रत्युवाच दिवाकरम्

English

The mountain accepted the prayer and contracted his body, his peaks lost height and the hermit then easily crossed it to go to the other side. He then said to the mountain.

अध्याय १८

श्लोक 61

एतामृतुमतीं जातां महिषो ऽन्यो ददर्श ह ।सा चाभ्यगाद् दितिवरं रक्षन्ती शीलमात्मनः

etāmṛtumatīṃ jātāṃ mahiṣo 'nyo dadarśa ha / sā cābhyagād ditivaraṃ rakṣantī śīlamātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

समायातोऽस्मि देवेश याचितुं त्वां महाद्युते सुतां संवरणस्यार्थे तस्य त्वं दातुमर्हसि त्तो वसिष्ठाय दिवाकरेण

English

<uq* ggt ftggTgsnft ggrag tfcigg:

अध्याय १८

श्लोक 62

तमुन्नामितनासं च महिषं वीक्ष्य दानवः ।खङ्ग निष्कृष्य तरसा महिषं समुपाद्रवत्

tamunnāmitanāsaṃ ca mahiṣaṃ vīkṣya dānavaḥ / khaṅga niṣkṛṣya tarasā mahiṣaṃ samupādravat

हिन्दी अर्थ

राज्ञोऽर्थतः संवरणस्य देवाः कृताञ्जलिर्वारुणिमाह देवी

English

<ggT g graft*? gftgsg ft ^fgsm^s^ciifiqi h \3 ^ii

अध्याय १८

श्लोक 63

तेनापि दैत्यस्तीक्ष्णाभ्यां शृङ्गाभ्यां हृदि ताडितः ।निर्भिन्नहृदयो भूमौ निपपात ममार च

tenāpi daityastīkṣṇābhyāṃ śṛṅgābhyāṃ hṛdi tāḍitaḥ / nirbhinnahṛdayo bhūmau nipapāta mamāra ca / /

अध्याय १८

श्लोक 64

मृते भर्तरि सा श्यामा यक्षाणां शरणं गता ।रक्षिता गुह्यकैः साध्वी निवार्य महिषं ततः

mṛte bhartari sā śyāmā yakṣāṇāṃ śaraṇaṃ gatā / rakṣitā guhyakaiḥ sādhvī nivārya mahiṣaṃ tataḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मन् मया द्षो महाग न परिचारिकाभिः। तथोरू करिहस्ततुल्यौ।

English

Until I return from that holy place after a bath safely to my asrama, remain as you are this time. In case my instruction is violated, I will curse you for dare consequences.

अध्याय १८

श्लोक 65

ततो निवारितो यक्षैर्हयारिर्मदनातुरः ।निपपात सरो दिव्यं ततो दैत्यैऽभवन्मृतः

tato nivārito yakṣairhayārirmadanāturaḥ / nipapāta saro divyaṃ tato daityai'bhavanmṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

ग्रीवाऽस्य शङ्काकृतिमादधाति नीलाश्च केशाः कुटिलाश्च तस्य कर्णौ समांसौ सुसमा च नासा।

English

With these words, lord Agastya moved to the south in space immediately and he stopped there by saying- "I will come again at an appropriate time."

अध्याय १८

श्लोक 66

नमरो नाम विख्यातो महाबलपराक्रमः ।यक्षानाश्रित्य तस्थौ स कालयन् श्वापदान् मुन्

namaro nāma vikhyāto mahābalaparākramaḥ / yakṣānāśritya tasthau sa kālayan śvāpadān mun

हिन्दी अर्थ

पदभ्यां कराभ्यां दशनाश्च शुभ्रा: देवीके पुनराविर्भाव-सम्बन्धी प्रश्नोत्तर; संवरण-तपतीका विवाह

English

The hermit constructed there a decent asrama with doors made up of pure gold, settled there king Vidarbha's daughter (Lopamudra) and returned to his own asrama.

अध्याय १८

श्लोक 67

स च दैत्येश्वरो यक्षैर्मालवटपुरस्सरैः ।चितामारोपितः सा च श्यामा तं चारुहत् पतिम्

sa ca daityeśvaro yakṣairmālavaṭapurassaraiḥ / citāmāropitaḥ sā ca śyāmā taṃ cāruhat patim

हिन्दी अर्थ

सूर्यके समान सुशोभित होने लगे। फिर भगवान् सूर्यने उन तपस्वी (अतिथि)-का अर्घ्य आदिसे (सत्कार) किया; उसके बाद उनसे उनके आनेका कारण पूछा। तब तपोधन वसिष्ठजीने सूर्यसे कहा -अति तेजस्वी देवेश! मैं राजपुत्र संवरणके लिये आपसे कन्याकी याचना करने आया हूँ। उसे आप (कृपया) प्रदान करें॥ ४२--४५॥

English

didlcjdf H<Ulc^ ftrit ^tdKlfadddPdHHjft: II ^ll

अध्याय १८

श्लोक 68

ततो ऽग्निमध्यादुत्तस्थौ पुरुषो रौद्रदर्शनः ।व्यद्रावयत् स तान् यक्षान् खङ्गपाणिर्भयङ्करः

tato 'gnimadhyāduttasthau puruṣo raudradarśanaḥ / vyadrāvayat sa tān yakṣān khaṅgapāṇirbhayaṅkaraḥ

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णु कहते हैं देवगण! उसके बाद सूर्यदेव घरपर आये और ब्राह्मणश्रेष्ठ वसिष्ठको राजा संवरणके लिये (अपनी) तपती नामकी उस कन्याको समर्पित कर दिया। फिर सूर्यपुत्रीको साथ लेकर वसिष्ठ अपने पवित्र आश्रममें आ गये। वह कन्या उस राजपुत्रका स्मरण कर और हाथ जोड़कर ऋषि बसिष्ठसे बोली --

English

That hermit with unique brilliance began to reside in his sky situated asrama during the adjacent of several seasons and the rest of time engrossed himself in penance at

अध्याय १८

श्लोक 69

ततो हतास्तु महिषाः सर्व एव महात्मना ।ऋते संरक्षितारं हि महिषं रम्भनन्दनम्

tato hatāstu mahiṣāḥ sarva eva mahātmanā / ṛte saṃrakṣitāraṃ hi mahiṣaṃ rambhanandanam

हिन्दी अर्थ

'तपतीने कहा-- वसिष्ठजी ! मैंने वनमें चिन्तामें विभोर होकर अपनी सेविकाओं तथा अप्सराओंके साथ देवपुत्रके समान (सौम्य सुन्दर) जिस व्यक्तिको देखा था, उसे मैं लक्षणोंसे राजकुमार समझ रही हूँ; क्योंकि उसके दोनों शुभ चरणोंमें चक्र, गदा और खड्गके चिह्न हैं। उसकी जाँघें तथा ऊरु दोनों हाथीकी सूँड़के समान हैं। उसकी कटि सिंहकी कटिके समान है तथा त्रिवलीयुक्त --तीन बलोंवाला उसका उदरभाग बहुत पतला है। उसकी गर्दन

English

As Vindhya watches those great as'ramas in sky, he fears since them of curse if did endeavour to rise-up. Considering that he still has not returned, he is existed with down leaned ridges.

अध्याय १८

श्लोक 70

स नामतः स्मृतो दैत्यो रक्तबीजो महामुन् ।यो ऽजयत् सर्वतो देवान् सेन्द्ररुद्रार्कमारुतान्

sa nāmataḥ smṛto daityo raktabījo mahāmun / yo 'jayat sarvato devān sendrarudrārkamārutān

हिन्दी अर्थ

शङ्खके समान है, दोनों भुजाएँ मोटी, कठोर और लम्बी हैं, दोनों करतल कमल-चिहसे अङ्कित हैं तथा उसका मस्तक छत्रके समान सुशोभित है। उसके बाल काले तथा घुँघराले हैं, दोनों कर्ण मांसल हैं, नासिका सुडौल है, उसके हाथों एवं पैरोंकी अँगुलियाँ सुन्दर पर्वयुक्त (पोरवाली) और लम्बी हैं और उसके दाँत श्वेत हैं ॥ ४८--५१॥

English

O great hermit! Agastya had pressed down the highest ridges of Vindhya mountain. Goddess Durga worshipped by hermits thus rode at the high ridge of that mountain in order to kill the Danavas.

अध्याय १८

श्लोक 71

एवं प्रभावा दनुपुङ्गवास्ते तेजो ऽधिकस्तत्र बभौ हयारिः ।राज्ये ऽभिषिक्तश्च महासुरेन्द्रैर्विनिर्जितैः शम्बरतारकाद्यैः

evaṃ prabhāvā danupuṅgavāste tejo 'dhikastatra babhau hayāriḥ / rājye 'bhiṣiktaśca mahāsurendrairvinirjitaiḥ śambaratārakādyaiḥ

हिन्दी अर्थ

तपतीने आगे कहा-- उस महापराक्रमी राजपुत्रके ये छः अङ्ग ऊँचे (सुडौल) हैं, नाभि, मध्य तथा हँसुली -ये तीन अङ्ग गम्भीर हैं और उसकी दोनों भुजाएँ तथा अण्डकोष--ये तीन अङ्ग लम्बे हैं। दोनों

English

The gods, siddhas, great serpents, vidyadhara and all beings including nymphs started living there happily and they all worshipped goddess

अध्याय १८

श्लोक 72

अशक्नुवद्भिः सहितैश्च देवैः सलोकपालैः सहुताशभास्करैः ।स्थानानि त्यक्तानि शशीन्द्रभास्करैर्धर्मश्च दूरे प्रतियोजितश्च

aśaknuvadbhiḥ sahitaiśca devaiḥ salokapālaiḥ sahutāśabhāskaraiḥ / sthānāni tyaktāni śaśīndrabhāskarairdharmaśca dūre pratiyojitaśca

हिन्दी अर्थ

लाल वर्णवाले हैं, केश, पक्ष्म (बरौनी) और कनीनिका (आँखकी पुतली)--ये चार अङ्ग कृष्ण हैं, दोनों भौहें, आँखके दोनों कोर तथा दोनों कान झुके हुए हैं, दाँत तथा नेत्र दो अङ्ग श्वेत वर्णके हैं, केश, मुख तथा नेहान्यकामां प्रवदन्ति सन्तो दातुं तथान्यस्य विभो क्षमस्व

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/vamp__u.htm | https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_vAmanapurANasaromAhAtmya.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Vamana Purana — Chapter 18

वामनपुराण

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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प्रकाशक अथवा पुरालेखागार · Archive:

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गणना पद्धति टिप्पणी · Numbering System:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.