अध्याय १३
श्लोक 1.13.1
॥ अयं वाव लोको हाउकारः वायुर्हाइकारश्चन्द्रमा अथकारः ।आत्मेहकारोऽग्निरीकारः
|| ayaM vAva loko hAukAraH vAyurhAikArashchandramA athakAraH | AtmehakAro.agnirIkAraH
हिन्दी अर्थ
अनिरुक्तोऽव्यक्तत्वादिदं चेदं जो अव्यक्तं होनेके कारण शह चेति निर्वक्तं न॒ शक्यत ओर यह" इस रूपे ० नही कि किया जा सकता, इसलिये अनिरुक्त स्तोमाक्षरसम्बन्धिनी उपासनाजका एल स्तोभाक्षरोपासनाफलमाद-- अब स्तोभाक्षरोकी उपास्नाका जो इस प्रकार इस सामसम्बन्धिनी उपनिषदो जानता है उसे बाणी, जो वाणीका फल है उस फलक देती है तथा वह अन्नवान् ओर अन्न भक्षण करनेवाला होता है
English
The syllable Hâu is this world (the earth), the syllable Hâi the air, the syllable Atha the moon, the syllable Iha the self, the syllable î is Agni, fire.