अध्याय ११
श्लोक 1.11.1
॥ अथ हैनं यजमान उवाच भगवन्तं वा अहं विविदिषाणीत्युषस्तिरस्मि चाक्रायण इति होवाच
|| atha hainaM yajamAna uvAcha bhagavantaM vA ahaM vividiShANItyuShastirasmi chAkrAyaNa iti hovAcha
हिन्दी अर्थ
ज्यं ऋछत्विकर्माथमस्त्वि- ऋलिक्कर्मोके स्यि रहं एेसा मया समतिसृष्टा मया सम्यक वरणकर ल्या हैवे ही ऋवि- ताम् । त्वया त्वेत › म्रसन्नतासे आज्ञा पराप्त कर स्तवन उषस्तिके प्रति प्रस्तोताका प्रदन अथ हैनं प्रस्तोतोपससाद शस्तोतर्या देवता तदनन्तर उस ( उपस्ति ) के पास शिष्यभावसे प्रस्तोता आथा ओर बोा-- “भगवन् आपने जो मुक्षत कहा था कि है प्रस्तोतः जो देवता प्रप्तावमे अनुगत है यदि तू उसे. विना जाने प्रस्तवन करेगा तो
English
Then the sacrificer said to him: 'I should like to know who you are, Sir.' He replied: 'I am Ushasti Kâkrâyana.'