Brahma Purana· Brahma Purāṇa
14
अध्याय 14 / 246

Adhyaya 14

57 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ57 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय १४

श्लोक 1

गान्धारी चैव माद्री च क्रोष्टोर् भार्ये बभूवतुः गान्धारी जनयाम् आस अनमित्रं महाबलम्

gāndhārī caiva mādrī ca kroṣṭor bhārye babhūvatuḥ gāndhārī janayām āsa anamitraṃ mahābalam

हिन्दी अर्थ

विष्णुसंस्मरणात् वासुदेवे मनो यस्य

English

Kro;tr wives—G&ndhari and M&dri. G&ndhirf gave birth to Anamitra of great might.

अध्याय १४

श्लोक 2

माद्री युधाजितं पुत्रं ततो ऽन्यं देवमीढुषम् तेषां वंशस् त्रिधा भूतो वृष्णीनां कुलवर्धनः

mādrī yudhājitaṃ putraṃ tato 'nyaṃ devamīḍhuṣam teṣāṃ vaṃśas tridhā bhūto vṛṣṇīnāṃ kulavardhanaḥ

हिन्दी अर्थ

जप, होम और अर्चन आदिके समय जिसका मन भगवान् वासुदेवमें लगा होता है, वह तो मोक्षका अधिकारी है । उसके लिये फलरूपसे इन्द्र आदिके पदकी प्राप्ति विन्नमात्र है। कहाँ तो जहाँसे पुनः

English

Midd gave birth to Yudhijit and Devamldhufa* Thus the flourishing family of VrfQis came to be threefold.

अध्याय १४

श्लोक 3

माद्र्याः पुत्रौ तु जज्ञाते श्रुतौ वृष्ण्यन्धकाव् उभौ जज्ञाते तनयौ वृष्णेः श्वफल्कश् चित्रकस् तथा

mādryāḥ putrau tu jajñāte śrutau vṛṣṇyandhakāv ubhau jajñāte tanayau vṛṣṇeḥ śvaphalkaś citrakas tathā

हिन्दी अर्थ

लौटना पड़ता है, ऐसे स्वर्गलोकमें जाना और कहाँ मोक्षके सर्वोत्तम बीज वासुदेवमन्त्रका जप! इनमें कोई तुलना ही नहीं है। इसलिये जो पुरुष

English

Madri had two (more) sons: the splendid VfSi and Andhaka. Vr?ni had two sons—Svaphalka and Citraka.

अध्याय १४

श्लोक 4

श्वफल्कस् तु मुनिश्रेष्ठा धर्मात्मा यत्र वर्तते नास्ति व्याधिभयं तत्र नावर्षस् तपम् एव च

śvaphalkas tu muniśreṣṭhā dharmātmā yatra vartate nāsti vyādhibhayaṃ tatra nāvarṣas tapam eva ca

हिन्दी अर्थ

रात-दिन भगवान् विष्णुका स्मरण करता है, वह

English

O excellent sages, once, Indra the chastiser of PAka did not shower rain in the realm of the king of Kaii, for three years.

अध्याय १४

श्लोक 5

कदाचित् काशिराजस्य विषये मुनिसत्तमाः त्रीणि वर्षाणि पूर्णानि नावर्षत् पाकशासनः

kadācit kāśirājasya viṣaye munisattamāḥ trīṇi varṣāṇi pūrṇāni nāvarṣat pākaśāsanaḥ

हिन्दी अर्थ

ग्रहों तथा भुवः आदि लोकोंकी स्थिति, श्रीविष्णुशक्तिका प्रभाव तथा शिशुमारचक्रका वर्णन ५७

English

He therefore brought the excessively htmoured Sva- phalka there (to his kingdom). Due to the arrival of Svhalka, Indra showered rain.

अध्याय १४

श्लोक 6

स तत्र चानयाम् आस श्वफल्कं परमार्चितम् श्वफल्कपरिवर्तेन ववर्ष हरिवाहनः

sa tatra cānayām āsa śvaphalkaṃ paramārcitam śvaphalkaparivartena vavarṣa harivāhanaḥ

हिन्दी अर्थ

अपने समस्त पातकोंका नाश हो जानेके कारण सुख और दुःख आदि तो मनका विकारमात्र है। कभी नरकमें नहीं पड़ता। एक ही वस्तु समय- ज्ञान ही परब्रह्मका स्वरूप है और अज्ञान बन्धनका समयपर दुःख-सुख, ईर्ष्या और क्रोधका कारण कारण है । यह सम्पूर्ण विश्व ज्ञानस्वरूप है । ज्ञानसे बनती है । अतः केवल दुःखरूप वस्तु कहाँसे बढकर कुछ भी नहीं है । ब्राह्मणो! विद्या और

English

O excellent brahmins, Prasena and Upadeva of divine splendour were born to UgrasenA, a woman of beautiful limbs, by Akrura.

अध्याय १४

श्लोक 7

श्वफल्कः काशिराजस्य सुतां भार्याम् अविन्दत गान्दिनीं नाम गां सा च ददौ विप्राय नित्यशः

śvaphalkaḥ kāśirājasya sutāṃ bhāryām avindata gāndinīṃ nāma gāṃ sā ca dadau viprāya nityaśaḥ

हिन्दी अर्थ

आयी ? वही वस्तु पहले प्रसन्नताका कारण होकर अविद्याको भी ज्ञानरूप ही समझो। इस प्रकार फिर दुःख देनेवाली बन जाती है। फिर वही मैंने तुमसे समस्त भूमण्डल, पाताल, नरक, समुद्र, क्रोध और प्रसन्नताका भी हेतु बनती है । इसलिये पर्वत, द्वीप, वर्ष तथा नदियोंका संक्षेपसे वर्णन कोई भी वस्तु न तो दुःखरूप है न सुखरूप। यह किया। अब और क्या सुनना चाहते हो?

English

Tantrija and Tantripala were the two sons of Kanavaka VIru and Afvahanu were the two heroic sons ol Grfijama.

अध्याय १४

श्लोक 8

दाता यज्वा च वीरश् च श्रुतवान् अतिथिप्रियः अक्रूरः सुषुवे तस्माच् छ्वफल्काद् भूरिदक्षिणः

dātā yajvā ca vīraś ca śrutavān atithipriyaḥ akrūraḥ suṣuve tasmāc chvaphalkād bhūridakṣiṇaḥ

हिन्दी अर्थ

ग्रहों तथा भुवः आदि लोकोंकी स्थिति, श्रीविष्णुशक्तिका प्रभाव तथा शिशुमारचक्रका वर्णन

English

Understand individually by their names the sons of great valour who were bom to Vasudeva in his highly blessed seven wives.

अध्याय १४

श्लोक 9

उपमद्गुस् तथा मद्गुर् मेदुरश् चारिमेजयः अविक्षितस् तथाक्षेपः शत्रुघ्नश् चारिमर्दनः

upamadgus tathā madgur meduraś cārimejayaḥ avikṣitas tathākṣepaḥ śatrughnaś cārimardanaḥ

हिन्दी अर्थ

मुनियोंने कहा--महाभाग लोमहर्षणजी ! उनसे एक लाख योजन ऊँचे सप्तर्षिमण्डल स्थित अब हम भुवः आदि लोकोंका, ग्रहोंकी स्थितिका है। सप्तर्षियोंसे लाख योजन ऊपर धुव हैं, जो तथा उनके परिमाणका यथार्थ वर्णन सुनना चाहते समस्त ज्योतिर्मण्डलके केन्द्र हैं। ध्रुवसे ऊपर हैं। आप कृपापूर्वक बतलायें। महर्लोक है, जहाँ एक कल्पतक जीवित रहनेवाले

English

Upamadgu, Madgu, Medura, Arimejaya, Avikshita, Akshepa, Shatrughna and Arimardana,

अध्याय १४

श्लोक 10

धर्मधृग् यतिधर्मा च धर्मोक्षान्धकरुस् तथा आवाहप्रतिवाहौ च सुन्दरी च वराङ्गना

dharmadhṛg yatidharmā ca dharmokṣāndhakarus tathā āvāhaprativāhau ca sundarī ca varāṅganā

हिन्दी अर्थ

लोमहर्षणजी बोले--सूर्य और चन्द्रमाकी महात्मा पुरुष निवास करते हैं। उसका विस्तार किरणोंसे समुद्र, नदी और पर्वतोंसहित जितने एक करोड़ योजन है। उसके ऊपर जनलोक है, भागमें प्रकाश फैलता है, उतने भागको पृथ्वी जिसका विस्तार दो करोड़ योजन है। वहीं शुद्ध कहते हैं । पृथ्वी विस्तृत होनेके साथ ही गोलाकार अन्तःकरणवाले ब्रह्मकुमार सनन्दन आदि महात्मा

English

Dharmadhrik, Yatidharma, Dharmoksha, Andhakara, Avaha, Prativaha, and the excellent woman Sundari.

अध्याय १४

श्लोक 11

अक्रूरेणोग्रसेनायां सुगात्र्यां द्विजसत्तमाः प्रसेनश् चोपदेवश् च जज्ञाते देववर्चसौ

akrūreṇograsenāyāṃ sugātryāṃ dvijasattamāḥ prasenaś copadevaś ca jajñāte devavarcasau

हिन्दी अर्थ

है। पृथ्वीसे एक लाख योजन ऊपर सूर्यमण्डलकी वास करते हैं। जनलोकसे ऊपर उससे चौगुने स्थिति है और सूर्यमण्डलसे लाख योजन दूर विस्तारवाला तपोलोक स्थित है, जहाँ शरीररहित चन्द्रमण्डल स्थित है। चन्द्रमण्डलसे लाख योजन वैराज आदि देवता रहते हैं। तपोलोकसे ऊपर ऊपर सम्पूर्ण नक्षत्रमण्डल प्रकाशित होता है । सत्यलोक प्रकाशित होता है, जो उससे छः गुना

English

Akrura, on Ugrasena's daughter Sugatri, best of Brahmins, begot Prasena and Upadeva, radiant as gods.

अध्याय १४

श्लोक 12

चित्रकस्याभवन् पुत्राः पृथुर् विपृथुर् एव च अश्वग्रीवो ऽश्वबाहुश् च स्वपार्श्वकगवेषणौ

citrakasyābhavan putrāḥ pṛthur vipṛthur eva ca aśvagrīvo 'śvabāhuś ca svapārśvakagaveṣaṇau

हिन्दी अर्थ

नक्षत्रमण्डलसे दो लाख योजन ऊँचे बुधकी स्थिति बड़ा है। वहाँ सिद्ध आदि एवं मुनिजन निवास है। बुधसे दो लाख योजन ऊपर शुक्र स्थित हैं । करते हैं। वह पुनर्जन्म एवं पुनर्मत्युका निवारण शुक्रसे दो लाख योजन मङ्गल तथा मङ्गलसे दो करनेवाला लोक है। जहाँतक पैरोंसे जाने योग्य लाख योजन ऊँचे देवगुरु बृहस्पति स्थित हैँ। पार्थिव वस्तु है, उसे भूलोक कहा गया है; उसका

English

Chitraka's sons were Prithu, Viprithu, Ashvagriva, Ashvabahu, Supashvaka and Gaveshana,

अध्याय १४

श्लोक 13

अरिष्टनेमिर् अश्वश् च सुधर्मा धर्मभृत् तथा सुबाहुर् बहुबाहुश् च श्रविष्ठाश्रवणे स्त्रियौ

ariṣṭanemir aśvaś ca sudharmā dharmabhṛt tathā subāhur bahubāhuś ca śraviṣṭhāśravaṇe striyau

हिन्दी अर्थ

बृहस्पतिसे दो लाख योजन ऊपर शनैश्वर हैं और विस्तार पहले बताया जा चुका है। भूमि और वस्त्वेकमेव दुःखाय सुखायेर्ष्योदयाय च। कोपाय च यतस्तस्माद् वस्तु दुःखात्मकं कुतः ॥ तदेव प्रीतये भूत्वा पुनर्दुःखाय जायते। तदेव कोपाय यतः प्रसादाय च जायते॥

English

Arishtanemi, Ashva, Sudharma, Dharmabhrit, Subahu and Bahubahu; and the two women Shravishtha and Shravana.

अध्याय १४

श्लोक 14

असिक्न्यां जनयाम् आस शूरं वै देवमीढुषम् महिष्यां जज्ञिरे शूरा भोज्यायां पुरुषा दश

asiknyāṃ janayām āsa śūraṃ vai devamīḍhuṣam mahiṣyāṃ jajñire śūrā bhojyāyāṃ puruṣā daśa

हिन्दी अर्थ

सूर्यके बीचमें जो सिद्ध एवं मुनियोंसे सेवित प्रकतिमें चेतन पुरुष व्याप्त है। ये प्रकृति और प्रदेश है, वह भुवर्लोक कहा गया है । यही दूसरा पुरुष एक-दूसरेके आश्रित हो भगवान् विष्णुकी लोक है। ध्रुव और सूर्यके बीचमें जो चौदह लाख शक्तिसे टिके हुए हैं। श्रीविष्णुकी शक्ति ही प्रकृति योजन विस्तृत स्थान है, उसे लोक-स्थितिका और पुरुषके पृथक् एवं संयुक्त होनेमें कारण है ।

English

On Asikni he begot Shura, Devamidhusha. On Mahishi, Shura had ten sons, on Bhojya.

अध्याय १४

श्लोक 15

वसुदेवो महाबाहुः पूर्वम् आनकदुन्दुभिः जज्ञे यस्य प्रसूतस्य दुन्दुभ्यः प्राणदन् दिवि

vasudevo mahābāhuḥ pūrvam ānakadundubhiḥ jajñe yasya prasūtasya dundubhyaḥ prāṇadan divi

हिन्दी अर्थ

विचार करनेवाले पुरुषोंने स्वर्गलोक बतलाया है । विप्रवरो! वही सृष्टिके समय प्रकृतिमें क्षोभका भू:, भुवः और स्व:--इन्हीं तीनोंको त्रैलोक्य कहते कारण होती है । जैसे वायु जलके कणोंसे रहनेवाली हें । विद्वान् ब्राह्मण इन तीनों लोकोंको कृतक शीतलताको धारण करती है, उसी प्रकार भगवान् (नाशवान्) कहते हें । इसी प्रकार ऊपरके जो विष्णुको शक्ति प्रकृति-पुरुषरूप सम्पूर्ण जगत्को

English

Vasudeva, the mighty-armed, first called Anakadundubhi — at his birth the drums sounded in heaven.

अध्याय १४

श्लोक 16

आनकानां च संह्रादः सुमहान् अभवद् दिवि पपात पुष्पवर्षश् च शूरस्य जनने महान्

ānakānāṃ ca saṃhrādaḥ sumahān abhavad divi papāta puṣpavarṣaś ca śūrasya janane mahān

हिन्दी अर्थ

जन, तप और सत्य नामक लोक हैं, वे तीनों धारण करती है। जैसे प्रथम बीजसे मूल, तने अकृतक (अविनाशी) कहलाते हैं। कृतक और और शाखा आदिसहित विशाल वक्ष उत्पन्न होता अकृतकके बीचमें महर्लोक है, जो कृतकाकृतक है, फिर उस वृक्षसे अन्यान्य बीज प्रकट होते हैं कहलाता है। यह कल्पान्तमें जनशून्य हो जाता और उन बीजोंसे भी पहले ही-जैसे वृक्ष उत्पन्न

English

A great uproar of drums arose in the sky, and a great rain of flowers fell at Shura's birth.

अध्याय १४

श्लोक 17

मनुष्यलोके कृत्स्ने ऽपि रूपे नास्ति समो भुवि यस्यासीत् पुरुषाग्र्यस्य कान्तिश् चन्द्रमसो यथा

manuṣyaloke kṛtsne 'pi rūpe nāsti samo bhuvi yasyāsīt puruṣāgryasya kāntiś candramaso yathā

हिन्दी अर्थ

है, किंतु नष्ट नही होता। ब्राह्मणो! इस प्रकार ये होते रहते हैं, उसी प्रकार पहले अव्याकृत प्रकृतिसे सात महालोक बतलाये गये हैं। पाताल भी सात महत्तत्व आदि उत्पन्न होते हैं, फिर उनसे देवता ही हैं। यही समूचे ब्रह्माण्डका विस्तार है। आदि प्रकट होते हैं, देवताओंसे उनके पुत्र और यह ब्रह्माण्ड ऊपर, नीचे तथा किनारेकी ओरसे उन पुत्रोंके भी पुत्र होते रहते हैं । जैसे एक वृक्षसे

English

In the whole human world there was no one like him in beauty on earth; that foremost man's radiance was like the moon's.

अध्याय १४

श्लोक 18

देवभागस् ततो जज्ञे तथा देवश्रवाः पुनः अनाधृष्टिः कनवको वत्सवान् अथ गृञ्जमः

devabhāgas tato jajñe tathā devaśravāḥ punaḥ anādhṛṣṭiḥ kanavako vatsavān atha gṛñjamaḥ

हिन्दी अर्थ

अण्डकटाहद्वारा घिरा हुआ है--ठीक उसी तरह, दूसरा वृक्ष उत्पन्न होनेपर पहले वृक्षकी कोई हानि जैसे कैथका बीज सब ओर छिलकेसे ढका रहता नहीं होती, उसी प्रकार नूतन भूतोंकी सृष्टिसे भूतोंका है। उसके बाद समूचे अण्डकटाहसे दसगुने हास नहीं होता। जैसे समीपवर्ती होनेमात्रसे आकाश विस्तारवाले जलके आवरणद्वारा यह ब्रह्माण्ड आवृत और काल आदि भी वृक्षके कारण हैं, उसी प्रकार

English

Then Devabhaga was born, and again Devashravas; Anadhrishti, Kanavaka, Vatsavan, Grinjama,

अध्याय १४

श्लोक 19

श्यामः शमीको गण्डूषः पञ्च चास्य वराङ्गनाः पृथुकीर्तिः पृथा चैव श्रुतदेवा श्रुतश्रवा

śyāmaḥ śamīko gaṇḍūṣaḥ pañca cāsya varāṅganāḥ pṛthukīrtiḥ pṛthā caiva śrutadevā śrutaśravā

हिन्दी अर्थ

है। इसी प्रकार जलका आवरण भी बाहरकी भगवान् श्रीहरि स्वयं विकृत न होते हुए ही सम्पूर्ण ओरसे अग्रिमय आवरणद्वारा घिरा हुआ है। अग्नि विश्वके कारण होते हैं। जैसे धानके बीजमें जड़ वायुसे, वायु आकाशसे और आकाश महत्त्त्वसे नाल, पत्ते, अङ्कुर, काण्ड, कोप, फूल, दूध, चावल, आवृत है। इस प्रकार ये सातों आवरण उत्तरोत्तर भूसी और कन--सभी रहते हैं तथा अङ्कुरित

English

Shyama, Shamika and Ganduusha; and his five excellent women: Prithukirti, Pritha, Shrutadeva, Shrutashrava,

अध्याय १४

श्लोक 20

राजाधिदेवी च तथा पञ्चैता वीरमातरः श्रुतश्रवायां चैद्यस् तु शिशुपालो ऽभवन् नृपः

rājādhidevī ca tathā pañcaitā vīramātaraḥ śrutaśravāyāṃ caidyas tu śiśupālo 'bhavan nṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

दसगुने बड़े हैं। महत्तत्वको आवृत करके प्रधान-- होनेके योग्य कारण-सामग्री पाकर प्रकट हो जाते प्रकृति स्थित है। प्रधान अनन्त है। उसका अन्त हैं, उसी प्रकार भिन्न-भिन्न कर्मोमें देव आदि सभी नहीं है और न उसके मापकी कोई संख्या ही है। शरीर स्थित रहते हैं तथा कारणभूत श्रीविष्णुशक्तिका वह अनन्त एवं असंख्यात बताया गया है। वही सहारा पाकर प्रकट हो जाते हैं।

English

and Rajadhidevi: these five were mothers of heroes. On Shrutashrava the Chaidya king Shishupala was born,

अध्याय १४

श्लोक 21

हिरण्यकशिपुर् यो ऽसौ दैत्यराजो ऽभवत् पुरा पृथुकीर्त्यां तु संजज्ञे तनयो वृद्धशर्मणः

hiraṇyakaśipur yo 'sau daityarājo 'bhavat purā pṛthukīrtyāṃ tu saṃjajñe tanayo vṛddhaśarmaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण जगतूका उपादान है। उसे ही परा प्रकृति। वे भगवान् विष्णु परब्रह्म हैं; उन्हींसे यह कहा गया है। उसके भीतर ऐसे-ऐसे कोटि-कोटि सम्पूर्ण जगत् उत्पन्न हुआ है, वे ही जगत्स्वरूप ब्रह्माण्ड स्थित हैं। जैसे लकड़ीमें आग और तिलमें हैं तथा उन्हींमें इस जगत्का लय होगा। वे परब्रह्म तेल व्याप्त रहता है, उसी प्रकार प्रधान अर्थात् और परम धामस्वरूप हैं, सत् और असत् भी वे

English

who was formerly the Daitya king Hiranyakashipu. On Prithukirti was born the son of Vriddhasharman,

अध्याय १४

श्लोक 22

करूषाधिपतिर् वीरो दन्तवक्रो महाबलः पृथां दुहितरं चक्रे कुन्तिस् तां पाण्डुर् आवहत्

karūṣādhipatir vīro dantavakro mahābalaḥ pṛthāṃ duhitaraṃ cakre kuntis tāṃ pāṇḍur āvahat

हिन्दी अर्थ

ग्रहों तथा भुवः आदि लोकोंकी स्थिति, श्रीविष्णुशक्तिका प्रभाव तथा शिशुमारचक्रका वर्णन

English

the hero, lord of the Karushas, the mighty Dantavakra. Kunti made Pritha her daughter; Pandu married her,

अध्याय १४

श्लोक 23

यस्यां स धर्मविद् राजा धर्मो जज्ञे युधिष्ठिरः भीमसेनस् तथा वाताद् इन्द्राच् चैव धनंजयः

yasyāṃ sa dharmavid rājā dharmo jajñe yudhiṣṭhiraḥ bhīmasenas tathā vātād indrāc caiva dhanaṃjayaḥ

हिन्दी अर्थ

ही हैं, वे ही परम पद हैं। यह सम्पूर्ण चराचर जगत् उनसे भिन्न नहीं है। वे ही अव्याकृत मूल प्रकृति और व्याकृत जगत्स्वरूप हैं। यह सब कुछ उन्हींमें लय होता और उन्हींके आधारपर

English

on whom Dharma, the righteous king, was born as Yudhishthira, and likewise Bhimasena from Vayu and Dhananjaya from Indra,

अध्याय १४

श्लोक 24

लोके प्रतिरथो वीरः शक्रतुल्यपराक्रमः अनमित्राच् छनिर् जज्ञे कनिष्ठाद् वृष्णिनन्दनात्

loke pratiratho vīraḥ śakratulyaparākramaḥ anamitrāc chanir jajñe kaniṣṭhād vṛṣṇinandanāt

हिन्दी अर्थ

स्थित रहता है। वे ही क्रियाओंके कर्ता (यजमान) हैं, उन्हींका यज्ञोंद्वारा यजन किया जाता है, यज्ञ और उसके फल भी वे ही हैं। युग आदि सब कुछ उन्हींसे प्रवृत्त होता है। उन श्रीहरिसे भिन्न

English

the world's hero of the Pratiratha rank, of valour equal to Shakra. From Anamitra, the youngest, the delight of the Vrishnis, Shini was born.

अध्याय १४

श्लोक 25

शैनेयः सत्यकस् तस्माद् युयुधानश् च सात्यकिः उद्धवो देवभागस्य महाभागः सुतो ऽभवत्

śaineyaḥ satyakas tasmād yuyudhānaś ca sātyakiḥ uddhavo devabhāgasya mahābhāgaḥ suto 'bhavat

हिन्दी अर्थ

लोमहर्षणजी कहते हैं- आकाशमें शिशुमार (गोह)-के आकारमें जो भगवानूका तारामय स्वरूप है, उसके पुच्छभागमें ध्रुवकी स्थिति है। ध्रुव स्वयं अपनी परिधिमें भ्रमण करते हुए सूर्य,

English

From him the Shaineya Satyaka and Yuyudhana Satyaki; Uddhava, greatly fortunate, was the son of Devabhaga.

अध्याय १४

श्लोक 26

पण्डितानां परं प्राहुर् देवश्रवसम् उत्तमम् अश्मक्यं प्राप्तवान् पुत्रम् अनाधृष्टिर् यशस्विनम्

paṇḍitānāṃ paraṃ prāhur devaśravasam uttamam aśmakyaṃ prāptavān putram anādhṛṣṭir yaśasvinam

हिन्दी अर्थ

चन्द्र आदि अन्य ग्रहोंको भी घुमाते हैं। ध्रुवके घूमनेपर उनके साथ ही समस्त नक्षत्र चक्रको भाँति घूमने लगते हैं। सूर्य, चन्द्रमा, तारे, नक्षत्र और ग्रह-ये सभी वायुमयी डोरीसे धुवमें बंधे

English

They declared Devashravas the best of the learned; Anadhrishti obtained a famed son, Ashmakya.

अध्याय १४

श्लोक 27

निवृत्तशत्रुं शत्रुघ्नं श्रुतदेवा त्व् अजायत श्रुतदेवात्मजास् ते तु नैषादिर् यः परिश्रुतः

nivṛttaśatruṃ śatrughnaṃ śrutadevā tv ajāyata śrutadevātmajās te tu naiṣādir yaḥ pariśrutaḥ

हिन्दी अर्थ

हुए हैं। शिशुमारके आकारका आकाशमें जो तारामय रूप बताया गया है, उसके आधार परम धामस्वरूप साक्षात् भगवान् नारायण हैं, जो शिशुमारके हृदय-देशमें स्थित हैं। देवता, असुर

English

Shrutadeva bore Nivrittashatru Shatrughna. Shrutadeva's son was the renowned Naishadi,

अध्याय १४

श्लोक 28

एकलव्यो मुनिश्रेष्ठा निषादैः परिवर्धितः वत्सवते त्व् अपुत्राय वसुदेवः प्रतापवान् अद्भिर् ददौ सुतं वीरं शौरिः कौशिकम् औरसम्

ekalavyo muniśreṣṭhā niṣādaiḥ parivardhitaḥ vatsavate tv aputrāya vasudevaḥ pratāpavān adbhir dadau sutaṃ vīraṃ śauriḥ kauśikam aurasam

हिन्दी अर्थ

और मनुष्योंसहित यह सम्पूर्ण जगत् भगवान् नारायणके ही आधारपर टिका हुआ है। सूर्य आठ महीनोंमें अपनी किरणांद्वारा रसात्मक जलका संग्रह करते हैं और उसे वर्षाकालमें बरसा देते

English

Ekalavya, best of sages, raised by Nishadas. For the childless Vatsavan, the mighty Vasudeva Shauri gave with water-libation a heroic son, Kaushika, his own.

अध्याय १४

श्लोक 29

गण्डूषाय ह्य् अपुत्राय विष्वक्सेनो ददौ सुतान् चारुदेष्णं सुदेष्णं च पञ्चालं कृतलक्षणम्

gaṇḍūṣāya hy aputrāya viṣvakseno dadau sutān cārudeṣṇaṃ sudeṣṇaṃ ca pañcālaṃ kṛtalakṣaṇam

हिन्दी अर्थ

हैं। उस वृष्टिके जलसे अन्न पैदा होता है और अन्नसे सम्पूर्ण जगतूका भरण-पोषण होता है। सूर्य अपनी तीखी किरणोंसे जगतका जल लेकर उसके द्वारा चन्द्रमाको पुष्टि करते हैं। धूम, अग्नि

English

For the childless Ganduusha, Vishvaksena gave sons: Charudeshna, Sudeshna and Panchala Kritalakshana.

अध्याय १४

श्लोक 30

असंग्रामेण यो वीरो नावर्तत कदाचन रौक्मिणेयो महाबाहुः कनीयान् द्विजसत्तमाः

asaṃgrāmeṇa yo vīro nāvartata kadācana raukmiṇeyo mahābāhuḥ kanīyān dvijasattamāḥ

हिन्दी अर्थ

स च विष्णुः परं ब्रह्म यतः सर्वमिदं जगत्। जगच्च यो यत्र चेदं तद् ब्रह्म परमं धाम सदसत्परमं पदम्। यस्य

English

The hero who never turned back from battle, the mighty-armed Raukmineya (Pradyumna), the youngest, best of Brahmins,

अध्याय १४

श्लोक 31

वायसानां सहस्राणि यं यान्तं पृष्ठतो ऽन्वयुः चारून् अद्योपभोक्ष्यामश् चारुदेष्णहतान् इति

vāyasānāṃ sahasrāṇi yaṃ yāntaṃ pṛṣṭhato 'nvayuḥ cārūn adyopabhokṣyāmaś cārudeṣṇahatān iti

हिन्दी अर्थ

और वायुरूप मेघोंमें स्थापित किया हुआ जल अपभ्रष्ट नहीं होता, अतएव मेघोंको अभ्र कहते हैं। वायुकी प्रेरणासे मेघस्थ जल पृथ्वीपर गिरता है। नदी, समुद्र, पृथ्वी तथा प्राणियोंके शरीरसे

English

whom thousands of crows followed as he went behind, saying "Today we shall feast on the charming ones slain by Charudeshna."

अध्याय १४

श्लोक 32

तन्त्रिजस् तन्त्रिपालश् च सुतौ कनवकस्य तौ वीरुश् चाश्वहनुश् चैव वीरौ ताव् अथ गृञ्जिमौ

tantrijas tantripālaś ca sutau kanavakasya tau vīruś cāśvahanuś caiva vīrau tāv atha gṛñjimau

हिन्दी अर्थ

निकला हुआ--ये चार प्रकारके जल सूर्य अपनी किरणोंद्वारा ग्रहण करते हैं और उन्हींको समयपर बरसाते हैं । इसके सिवा वे आकाशगङ्ाके जलको भी लेकर उसे बादलोंमें स्थापित किये बिना ही

English

Tantrija and Tantripala were Kanavaka's two sons; Viru and Ashvahanu, and the two heroes Grinjima.

अध्याय १४

श्लोक 33

श्यामपुत्रः शमीकस् तु शमीको राज्यम् आवहत् जुगुप्समानो भोजत्वाद् राजसूयम् अवाप सः

śyāmaputraḥ śamīkas tu śamīko rājyam āvahat jugupsamāno bhojatvād rājasūyam avāpa saḥ

हिन्दी अर्थ

शीघ्र पृथ्वीपर बरसा देते हैं। उस जलका स्पर्श होनेसे मनुष्यके पाप-पङ्क धुल जाते हैं, जिससे वह नरकमें नहीं पड़ता। यह दिव्य स्त्रान माना गया है। कृत्तिका आदि विषम नक्षत्रोंमें सूर्यके

English

Shamika, son of Shyama, took the kingdom; disdaining Bhoja-hood, he obtained the Rajasuya.

अध्याय १४

श्लोक 34

अजातशत्रुः शत्रूणां जज्ञे तस्य विनाशनः वसुदेवसुतान् वीरान् कीर्तयिष्याम्य् अतः परम्

ajātaśatruḥ śatrūṇāṃ jajñe tasya vināśanaḥ vasudevasutān vīrān kīrtayiṣyāmy ataḥ param

हिन्दी अर्थ

दिखायी देते हुए आकाशसे जो जल गिरता है, उसे दिग्गजोंद्वारा फेंका हुआ आकाशगङ्ाका जल समझना चाहिए। इसी प्रकार भरणी आदि सम संख्यावाले नक्षत्रॉमें सूर्यके दिखायी देते हुए

English

Ajatashatru, destroyer of enemies, was born to him. I shall next tell of the heroic sons of Vasudeva.

अध्याय १४

श्लोक 35

वृष्णेस् त्रिविधम् एवं तु बहुशाखं महौजसम् धारयन् विपुलं वंशं नानर्थैर् इह युज्यते

vṛṣṇes trividham evaṃ tu bahuśākhaṃ mahaujasam dhārayan vipulaṃ vaṃśaṃ nānarthair iha yujyate

हिन्दी अर्थ

आकाशसे जो जल गिरता है, वह भी आकाशगङ्गाका ही जल है, जिसे सूर्यकी किरणें तत्काल ले आकर बरसाती हैं। यह दोनों ही प्रकारका जल अत्यन्त पवित्र और मनुष्योंका पाप दूर करनेवाला

English

Thus the threefold, many-branched, greatly mighty line of Vrishni, holding a vast lineage, is not joined with misfortunes here.

अध्याय १४

श्लोक 36

याः पत्न्यो वसुदेवस्य चतुर्दश वराङ्गनाः पौरवी रोहिणी नाम मदिरादितथावरा

yāḥ patnyo vasudevasya caturdaśa varāṅganāḥ pauravī rohiṇī nāma madirāditathāvarā

हिन्दी अर्थ

है। आकाशगङ्गाके जलका स्पर्श दिव्य स्नान है । बादलोंके द्वारा जो जलको वर्षा होती है, वह प्राणियोंके जीवनके लिये सब प्रकारके अन्न आदिको पुष्टि करती है। अतः वह जल अमृत

English

The fourteen excellent wives of Vasudeva: Pauravi, named Rohini, Madira, Adithi and Avara,

अध्याय १४

श्लोक 37

वैशाखी च तथा भद्रा सुनाम्नी चैव पञ्चमी सहदेवा शान्तिदेवा श्रीदेवी देवरक्षिता

vaiśākhī ca tathā bhadrā sunāmnī caiva pañcamī sahadevā śāntidevā śrīdevī devarakṣitā

हिन्दी अर्थ

माना गया है। उसके द्वारा अत्यन्त पुष्ट हुई सब प्रकारकी ओषधियाँ फलती, पकती एवं प्रजाके उपयोगमें आती हैं। उन ओषधियोंसे शास्त्रदर्शी मनुष्य प्रतिदिन विहित यज्ञोंका अनुष्ठान करके

English

Vaishakhi, Bhadra, Sunamni the fifth, Sahadeva, Shantideva, Shridevi, Devarakshita,

अध्याय १४

श्लोक 38

वृकदेव्य् उपदेवी च देवकी चैव सप्तमी सुतनुर् वडवा चैव द्वे एते परिचारिके

vṛkadevy upadevī ca devakī caiva saptamī sutanur vaḍavā caiva dve ete paricārike

हिन्दी अर्थ

कर्ता क्रियाणां स च इज्यते क्रतुः स एव तत्कर्मफलं च तस्य यत्। युगादि यस्माच्च भवेदशेषतो हरेर्न किञ्चिद् व्यतिरिक्तमस्ति तत्॥

English

Vrikadevi, Upadevi, and Devaki the seventh; Sutanu and Vadava were two female attendants.

अध्याय १४

श्लोक 39

पौरवी रोहिणी नाम बाह्लिकस्यात्मजाभवत् ज्येष्ठा पत्नी मुनिश्रेष्ठा दयितानकदुन्दुभेः

pauravī rohiṇī nāma bāhlikasyātmajābhavat jyeṣṭhā patnī muniśreṣṭhā dayitānakadundubheḥ

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मण आदि वर्ण, सम्पूर्ण देवता, पशु, भूतगण हैं। वे शिशुमारचक्रके हृदय-देशमें स्थित हैं। वे तथा स्थावर-जङ्गमरूप सम्पूर्ण जगत्--ये सब ही सम्पूर्ण भूतोंके आदि, पालक तथा सनातन वृष्टिके द्वारा ही धारण किये गये हैं। वृष्टि सूर्यके प्रभु हैं। मुनिवरो! इस प्रकार मैंने पृथ्वी, समुद्र द्वारा होती है । सूर्यके आधार ध्रुव, ध्रुवके शिशुमारचक्र आदिसे युक्त ब्रह्माण्डका वर्णन किया। अब और

English

Pauravi, named Rohini, was a daughter of Bahlika, best of sages, the eldest wife, beloved of Anakadundubhi.

अध्याय १४

श्लोक 40

लेभे ज्येष्ठं सुतं रामं शरण्यं शठम् एव च दुर्दमं दमनं शुभ्रं पिण्डारकम् उशीनरम्

lebhe jyeṣṭhaṃ sutaṃ rāmaṃ śaraṇyaṃ śaṭham eva ca durdamaṃ damanaṃ śubhraṃ piṇḍārakam uśīnaram

हिन्दी अर्थ

तथा शिशुमारचक्रके आश्रय साक्षात् भगवान् नारायण क्या सुनना चाहते हो?

English

She obtained as eldest son Rama, then Sharanya, Shatha, Durdama, Damana, Shubhra, Pindaraka and Ushinara.

अध्याय १४

श्लोक 41

चित्रा नाम कुमारी च रोहिणीतनया नव चित्रा सुभद्रेति पुनर् विख्याता मुनिसत्तमाः

citrā nāma kumārī ca rohiṇītanayā nava citrā subhadreti punar vikhyātā munisattamāḥ

हिन्दी अर्थ

मुनियोंने कहा-- धर्मके ज्ञाता सूतजी ! पृथ्वी- पर जो-जो पवित्र तीर्थ और मन्दिर हैं, उनका वर्णन कीजिये। इस समय हमारे मनमें उन्हींका वर्णन सुननेकी इच्छा है।

English

The girl named Chitra was Rohini's daughter, nine children in all; Chitra again was famed as Subhadra, best of sages.

अध्याय १४

श्लोक 42

वसुदेवाच् च देवक्यां जज्ञे शौरिर् महायशाः रामाच् च निशठो जज्ञे रेवत्यां दयितः सुतः

vasudevāc ca devakyāṃ jajñe śaurir mahāyaśāḥ rāmāc ca niśaṭho jajñe revatyāṃ dayitaḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

लोमहर्षणजी बोले--जिसके हाथ, पैर और मन काबूमें हों तथा जिसमें विद्या, तप और कीर्ति हो, वह मनुष्य तीर्थके फलका भागी होता है। पुरुषका शुद्ध मन, शुद्ध वाणी तथा वशमें की हुई

English

From Vasudeva on Devaki was born the greatly famed Shauri (Krishna); from Rama on Revati, a beloved son, Nishatha.

अध्याय १४

श्लोक 43

सुभद्रायां रथी पार्थाद् अभिमन्युर् अजायत अक्रूरात् काशिकन्यायां सत्यकेतुर् अजायत

subhadrāyāṃ rathī pārthād abhimanyur ajāyata akrūrāt kāśikanyāyāṃ satyaketur ajāyata

हिन्दी अर्थ

इन्द्रियाँ--ये शारीरिक तीर्थ हैं, जो स्वर्गका मार्ग सूचित करती हैं। भीतरका दूषित चित्त तीर्थस्नानसे शुद्ध नहीं होता। जिसका अन्तःकरण दूषित हे, जो दम्भमें रुचि रखता है तथा जिसकी इन्द्रियाँ

English

On Subhadra by Partha the car-warrior Abhimanyu was born; from Akrura on a Kashi girl, Satyaketu was born.

अध्याय १४

श्लोक 44

वसुदेवस्य भार्यासु महाभागासु सप्तसु ये पुत्रा जज्ञिरे शूराः समस्तांस् तान् निबोधत

vasudevasya bhāryāsu mahābhāgāsu saptasu ye putrā jajñire śūrāḥ samastāṃs tān nibodhata

हिन्दी अर्थ

चञ्चल हैं, उसे तीर्थ, दान, व्रत और आश्रम भी पवित्र नहीं कर सकते। मनुष्य इन्द्रियोंको अपने वशमें करके जहाँ-जहाँ निवास करता है, वहीं- वहीं कुरुक्षेत्र, प्रयाग और पुष्कर आदि तीर्थ वास

English

Hear all the heroic sons who were born to Vasudeva's seven fortunate wives.

अध्याय १४

श्लोक 45

भोजश् च विजयश् चैव शान्तिदेवासुताव् उभौ वृकदेवः सुनामायां गदश् चास्तां सुताव् उभौ

bhojaś ca vijayaś caiva śāntidevāsutāv ubhau vṛkadevaḥ sunāmāyāṃ gadaś cāstāṃ sutāv ubhau

हिन्दी अर्थ

करने लगते हें । द्विजवरो! अब में पृथ्वीके पवित्र

English

Bhoja and Vijaya, both sons of Shantideva; Vrikadeva had on Sunama two sons, Gada and (another).

अध्याय १४

श्लोक 46

अगावहं महात्मानं वृकदेवी व्यजायत कन्या त्रिगर्तराजस्य भार्या वै शिशिरायणेः

agāvahaṃ mahātmānaṃ vṛkadevī vyajāyata kanyā trigartarājasya bhāryā vai śiśirāyaṇeḥ

हिन्दी अर्थ

धर्मोद्धव, बन्धप्रमोचन, गङ्गाद्वार, पञ्चकूट, मध्यकेसर, चक्रप्रभ, मतङ्ग, कुशदण्ड, दंष्टाकुण्ड, विष्णुतीर्थ, सार्वकामिकतीर्थ, मत्स्यतिल, ब्रह्मकुण्ड, वहिकुण्ड,

English

Vrikadevi bore the great-souled Agavaha, wife of the Trigarta king's son Shishirayana.

अध्याय १४

श्लोक 47

जिज्ञासां पौरुषे चक्रे न चस्कन्दे च पौरुषम् कृष्णायससमप्रख्यो वर्षे द्वादशमे तथा

jijñāsāṃ pauruṣe cakre na caskande ca pauruṣam kṛṣṇāyasasamaprakhyo varṣe dvādaśame tathā

हिन्दी अर्थ

स्थूलश्व॒ड़, स्थूलदण्ड, उर्वशी, लोकपाल, मनुवर, सोमशैल, सदाप्रभ, मेरुकुण्ड, सोमाभिषेचनतीर्थ, महास्त्रोत, कोटरक, पञ्चधार, त्रिधार, सप्तधार, एकधार, अमरकण्टक, शालग्राम, कोदिद्रुम, बिल्वप्रभ, देवह्रद,

English

He made a test of manhood and did not shed manhood; (born) of dark-iron radiance in the twelfth year.

अध्याय १४

श्लोक 48

मिथ्याभिशस्तो गार्ग्यस् तु मन्युनातिसमीरितः घोषकन्याम् उपादाय मैथुनायोपचक्रमे

mithyābhiśasto gārgyas tu manyunātisamīritaḥ ghoṣakanyām upādāya maithunāyopacakrame

हिन्दी अर्थ

विष्णुहृद, शङ्खप्रभ, देवकुण्ड, वज्रायुध, अग्निप्रभ, पुंनाग, देवप्रभ, विद्याधरतीर्थ, गान्धर्वतीर्थ, मणिपुर

English

Falsely accused, Gargya, greatly agitated by anger, took a cowherd's daughter and began to have intercourse.

अध्याय १४

श्लोक 49

गोपाली चाप्सरास् तस्य गोपस्त्रीवेषधारिणी धारयाम् आस गार्ग्यस्य गर्भं दुर्धरम् अच्युतम्

gopālī cāpsarās tasya gopastrīveṣadhāriṇī dhārayām āsa gārgyasya garbhaṃ durdharam acyutam

हिन्दी अर्थ

वटमूल, स्रानदण्ड, विष्णुपद, कन्याश्रम, वायुकुण्ड, जम्बूमार्ग, गभस्तितीर्थ, यजातिपतन, भद्रवट, महाकालवन, नर्मदातीर्थ, तीर्थवञ्र, अर्बुद, पिङ्गतीर्थ, वासिष्ठतीर्थ, पृथुसंगम, दौर्वासिक, पिञ्जरक, ऋषितीर्थ,

English

A cowherd apsaras, in the guise of a cowherd's wife, bore Gargya's embryo, hard to bear, unfailing.

अध्याय १४

श्लोक 50

मानुष्यां गर्गभार्यायां नियोगाच् छूलपाणिनः स कालयवनो नाम जज्ञे राजा महाबलः

mānuṣyāṃ gargabhāryāyāṃ niyogāc chūlapāṇinaḥ sa kālayavano nāma jajñe rājā mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मतुङ्ग, वसुतीर्थ, कुमारिक, शक्रतीर्थ, पञ्चनद,

English

By the command of the trident-bearer, on a mortal wife of Garga was born the mighty king named Kalayavana,

अध्याय १४

श्लोक 51

वृत्तपूर्वार्धकायस् तु सिंहसंहननो युवा अपुत्रस्य स राज्ञस् तु ववृधे ऽन्तःपुरे शिशुः

vṛttapūrvārdhakāyas tu siṃhasaṃhanano yuvā aputrasya sa rājñas tu vavṛdhe 'ntaḥpure śiśuḥ

हिन्दी अर्थ

तीर्थो और मन्दिरोंका संक्षेपसे वर्णन आरम्भ करता रेणुकातीर्थ, पैतामह, विमलतीर्थ, रुद्रपाद, मणिमान्,

English

his upper half of ordinary body but with a lion's frame, a youth; the child grew up in the inner apartments of the childless king.

अध्याय १४

श्लोक 52

यवनस्य मुनिश्रेष्ठाः स कालयवनो ऽभवत् आयुध्यमानो नृपतिः पर्यपृच्छद् द्विजोत्तमम्

yavanasya muniśreṣṭhāḥ sa kālayavano 'bhavat āyudhyamāno nṛpatiḥ paryapṛcchad dvijottamam

हिन्दी अर्थ

हुँ, सुनो। पुष्कर, नैमिषारण्य, प्रयाग, धर्मारण्य, धेनुक, चम्पकारण्य, सैन्धवारण्य, मगधारण्य, दण्डकारण्य, गया, प्रभास, श्रीतीर्थ, कनखल, भृगुतुङ्ग, हिरण्याक्ष, भीमारण्य, कुशस्थली, लोहाकुल, केदार,

English

He became Kalayavana, best of sages, of the Yavana (king). The king, as he was fighting, asked the best of Brahmins:

अध्याय १४

श्लोक 53

वृष्ण्यन्धककुलं तस्य नारदो ऽकथयद् विभुः अक्षौहिण्या तु सैन्यस्य मथुराम् अभ्ययात् तदा

vṛṣṇyandhakakulaṃ tasya nārado 'kathayad vibhuḥ akṣauhiṇyā tu sainyasya mathurām abhyayāt tadā

हिन्दी अर्थ

मन्दरारण्य, महाबल, कोटितीर्थ, रूपतीर्थ, शूकर, चक्रतीर्थ, योगतीर्थ, सोमतीर्थ शाखोटक, कोकामुख,

English

Narada, the lord, told him of the Vrishni-Andhaka family; with an akshauhini of troops he then marched to Mathura.

अध्याय १४

श्लोक 54

दूतं संप्रेषयाम् आस वृष्ण्यन्धकनिवेशनम् ततो वृष्ण्यन्धकाः कृष्णं पुरस्कृत्य महामतिम्

dūtaṃ saṃpreṣayām āsa vṛṣṇyandhakaniveśanam tato vṛṣṇyandhakāḥ kṛṣṇaṃ puraskṛtya mahāmatim

हिन्दी अर्थ

कामाख्य, कृष्णतीर्थ, कुलिङ्गक, यजनतीर्थ, याजनतीर्थ, ब्रह्मवालुक, पुष्पन्यास, पुण्डरीक, मणिपूर, दीर्घसत्र, हयपद, अनशनतीर्थ, गङ्गोद्धेद,

English

He sent a messenger to the Vrishni-Andhaka dwelling. Then the Vrishnis and Andhakas, placing the wise Krishna in front,

अध्याय १४

श्लोक 55

समेता मन्त्रयाम् आसुर् यवनस्य भयात् तदा कृत्वा विनिश्चयं सर्वे पलायनम् अरोचयन्

sametā mantrayām āsur yavanasya bhayāt tadā kṛtvā viniścayaṃ sarve palāyanam arocayan

हिन्दी अर्थ

सिद्धेश्वर, मित्रबल, कालिकाश्रम, वटावट, भद्रवट, कौशाम्बी, दिवाकर, सारस्वतट्टीप, विजयतीर्थ,

English

gathered and took counsel out of fear of the Yavana; having made a decision, they all approved flight.

अध्याय १४

श्लोक 56

विहाय मथुरां रम्यां मानयन्तः पिनाकिनम् कुशस्थलीं द्वारवतीं निवेशयितुम् ईप्सवः

vihāya mathurāṃ ramyāṃ mānayantaḥ pinākinam kuśasthalīṃ dvāravatīṃ niveśayitum īpsavaḥ

हिन्दी अर्थ

कामदतीर्थ, रुद्रकोटि, सुमनस्तीर्थ, समन्तपञ्चक, ब्रह्मतीर्थ, सुदर्शनतीर्थ, पारिप्लव, पृथूदक,

English

Leaving lovely Mathura, honouring Pinakin (Shiva), wishing to found Kushasthali as Dvaravati.

अध्याय १४

श्लोक 59

इति कृष्णस्य जन्मेदं यः शुचिर् नियतेन्द्रियः पर्वसु श्रावयेद् विद्वान् अनृणः स सुखी भवेत्

iti kṛṣṇasya janmedaṃ yaḥ śucir niyatendriyaḥ parvasu śrāvayed vidvān anṛṇaḥ sa sukhī bhavet

हिन्दी अर्थ

यक्षिणीहृद, पुण्डरीक, सोमतीर्थ, मुञ्जवट, बदरीवन, रत्रमूलक, स्वर्लोकद्वार, पञ्चतीर्थ, कपिलातीर्थ, सूर्यतीर्थ, शङ्खिनीतीर्थ, गोभवनतीर्थ, यक्षराजतीर्थ, ब्रह्मावर्त, कामेश्वर, मातृतीर्थ, शातवनतीर्थ,

English

This is the birth of Krishna; the learned man who, pure and with controlled senses, makes it heard on parvan days becomes free of debt and happy.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 14
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.